महिलाओं की चिंता है पर उन्हें टिकट नहीं

  • 6 फरवरी 2015
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में 'महिला सुरक्षा' एक अहम मुद्दा है और सभी पार्टियां इसे उठा रही हैं.

इसके बावजूद महिला वोटरों के अनुपात में बहुत कम महिलाओं को इस चुनाव में टिकट दिए गए हैं.

कुल 70 विधानसभा सीटों पर तीनों प्रमुख पार्टियों ने कुल 19 महिलाओं को टिकट दिया है.

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दिल्ली विधानसभा चुनाव में महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है इस पर सभी पार्टियां एक भाषा में बात कर रही हैं.

महिला उम्मीदार भारतीय जनता पार्टी की हो, कांग्रेस की या फिर आम आदमी पार्टी की- सभी महिला सुरक्षा के लिए कई क़दम उठाने की बात कर रही हैं.

आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई ठोस क़दम उठाने का वादा किया है इनमें महिला दल, सीसीटीवी कैमरे और बसों में महिला सुरक्षाकर्मी शामिल हैं.

लेकिन महिला सशक्तिकरण की कोशिश में सभी पार्टियां पीछे नज़र आ रही हैं.

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दिल्ली में महिला वोटर 58 लाख से ज़्यादा हैं, लेकिन तीनों प्रमुख पार्टियों ने 70 सीटों वाली दिल्ली विधानसभा के लिए कुल 19 महिलाओं को मैदान में उतारा है.

इनमें भाजपा आठ महिला उम्मीदवारों के साथ सबसे आगे है, जिनमें कृष्णा नगर से पार्टी की मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी भी शामिल हैं.

इनके अलावा प्रमुख महिला उम्मीदवार हैं हाल ही में भाजपा में शामिल हुईं पूर्व केंद्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ और 'आप' के अरविंद केजरीवाल को चुनौती देने वाली भाजपा की नूपुर शर्मा.

'आप' छह महिला उम्मीदवारों के साथ दूसरे नंबर पर है, जिनमें 'आप' सरकार में मंत्री रह चुकीं राखी बिरला शामिल हैं.

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कांग्रेस ने पांच महिला उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं जिनमें पहली बार चुनावी मैदान में उतरीं राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी शामिल हैं.

वक़्त लगेगा

फिल्म अभिनेत्री गुल पनाग आम आदमी पार्टी के प्रचार में काफ़ी सक्रिय हैं. वह पिछले साल आम चुनाव में चंडीगढ़ से पार्टी की उम्मीदवार भी थीं.

वह कहती हैं, "अफ़सोस है कि हमारे समाज की पुरुष प्रधान वाली मानसिकता का असर सियासी पार्टियों पर भी है."

गुल के अनुसार, उनकी पार्टी महिलाओं के लिए 33 के बजाए 50 फ़ीसदी आरक्षण करने का इरादा रखती है.

लेकिन इस चुनाव में सिर्फ़ छह महिला उमीदवार देखकर ऐसा नहीं लगता कि वह महिला शक्ति को बढ़ावा देना चाहती है?

इस पर गुल पनाग कहती हैं, "हम कोशिश में लगे हैं. इसमें वक़्त लगेगा. पहले महिलाएं सामने तो आएं. हम तो केवल दो साल पुरानी पार्टी हैं. पुरानी पार्टियों से क्यों नहीं यह सवाल करते".

खुद आगे आना होगा

शर्मिष्ठा मुखर्जी ग्रेटर कैलाश विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उमीदवार हैं.

वह कहती है, "बिलकुल हर पार्टी को कोशिश करनी चाहिए थी कि अधिक से अधिक महिलाओं को टिकट दें."

उनका कहना था कि उनकी पार्टी हमेशा महिलाओं के शक्तिकरण के लिए क़दम उठाती आई है. "मैं आपको याद दिलाना चाहती हूँ कि पंचायत स्तर पर राजीव गांधी ही महिला आरक्षण बिल लाए थे".

महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की वकालत करते हुए भाजपा सांसद मनोज तिवारी कहते हैं, "किरण बेदी एक दबंग महिला हैं. हम शाज़िया इल्मी को पार्टी में लाए."

आम महिला वोटरों के बीच राय यह थी कि खुद महिलाओं को सियासत में सामने आने की ज़रूरत है.

किरण बेदी की एक समर्थक ने कहा अगर वह मुख्यमंत्री बनीं तो इससे महिलाओं को प्रोत्साहन मिलेगा.

लेकिन आप की महिला समर्थक कम नहीं हैं. एक कॉलेज छात्रा ने कहा कि हाल में पार्टी (आप) ने डेल्ही डायलॉग्स कराए थे जिनमें महिलाओं को भी शामिल किया गया और उनके मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया गया था.

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