नहीं चाहिए इमाम बुख़ारी का सपोर्ट: आप

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि उनका मानना है कि दिल्ली चुनाव को लेकर जारी किए गए फ़तवे के जो लोग ख़िलाफ़ हैं, उन्हें सौ फ़ीसदी मतदान करना चाहिए.

दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में जेटली ने कहा, "इस तरह के फ़तवे पहले भी जारी होते रहे हैं. मैंने एक बार गुजरात चुनावों में इसी तरह के फ़तवे पर कहा था कि जो लोग फ़तवे के विरोध में हैं उन्हें सौ फ़ीसदी मतदान करना चाहिए, और इस समय भी मेरा यही जवाब है."

जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुख़ारी ने मुसलमानों से आम आदमी पार्टी का समर्थन करने की अपील की थी.

उधर, ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के मौलाना मोहम्मद साजिद रशिदी ने भी गुरुवार को कहा था, "दिल्ली की ख़ुशी के लिए हमने तय किया है कि हमें आम आदमी पार्टी को समर्थन देना चाहिए. हम मुसलमानों से भाजपा को वोट देने की बजाय आप को वोट देने की अपील करेंगे."

इमाम का समर्थन ठुकराया

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इस बीच आम आदमी पार्टी ने जामा मस्जिद के शाही इमाम के समर्थन को ठुकरा दिया है

आप के नेता संजय सिंह ने कहा, "हम इमाम बुखारी के विचारों से सहमत नहीं हैं. जिस तरह से अपने बेटे की दस्तारबंदी में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को नहीं बुलाया और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को न्यौता दिया, हमें उस पर ऐतराज़ है."

उन्होंने कहा कि उन्हें सभी धर्मों के लोगों का समर्थन है.

आप के नेता आशुतोष ने कहा,"आप सांप्रदायिक राजनीति के ख़िलाफ़ है और इमाम बुख़ारी के बयान के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली का बयान आना संदेह पैदा करता है."

अराजकता बनाम सुशासन

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जेटली ने कहा कि दिल्ली की जनता को अराजकता और सुशासन में से एक को चुनना है.

उन्होंने आरोप कि इन चुनावों में आप का दोहरा चरित्र खुलकर सामने आ गया है.

एक सवाल के जवाब में आरोप लगाते हुए कहा, "उन्हें शराब बांटना और चंदे का काला धन आचार संहिता का उल्लंघन नहीं लगता और मतदाताओं को पत्र भेजना आचार संहिता का उल्लंघन नज़र आता है."

जेटली ने कहा, "आम आदमी पार्टी गलियों तक ठीक है, सचिवालय के लिए नहीं."

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