क्या भंग होगी बिहार विधानसभा?

नीतीश कुमार, जीतनराम मांझी इमेज कॉपीरइट Shailendra Kumar

बिहार में मचे सियासी उठापटक के बीच मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के नेतृत्व में हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य विधानसभा को भंग करने के मुद्दे पर मंत्रिपरिषद में गंभीर मतभेद उभर आए हैं.

बैठक से बाहर निकलते हुए नीतीश खेमे के माने जाने वाले मंत्रियों ने बताया कि प्रस्ताव का समर्थन केवल सात मंत्रियों ने किया जबकि 21 मंत्रियों ने इसका विरोध किया. इस संबंध में मंत्री श्याम रजक ने बताया कि बैठक में मंत्री नरेंद्र सिंह ने विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पेश किया जिसे ज्यादातर मंत्रियों ने खारिज कर दिया गया.

अब आगे ये देखना होगा कि मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी इस मुद्दे पर क्या करते हैं.

इस बीच बिहार के कार्यकारी राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री मांझी के उस अनुशंसा को स्वीकार कर लिया है जिसमें उन्होंने अपने दो मंत्रियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा की थी.

राजभवन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है- मुख्यमंत्री की सलाह पर महामहिम राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि प्रशांत कुमार शाही और राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह तत्कालीन प्रभाव से राज्य के मंत्री और मंत्री परिषद के सदस्य नहीं रहेंगे.

भूमिका

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption नीतीश कुमार के इस्तीफ़ा देने के बाद मांझी बने थे मुख्यमंत्री

हालांकि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने भी पत्र लिखकर राज्यपाल से यह आग्रह किया था कि वे मांझी की अनुशंसा नहीं माने क्योंकि मांझी ने विधायकों का बहुमत खो दिया है.

जानकारों के अनुसार ऐसे में बिहार की सियासत में राज्यपाल की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण हो गई है.

इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) नेता और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाक़ात की थी.

ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि जीतनराम मांझी शायद अपने पद से त्यागपत्र दे सकते हैं.

सियासी हलकों में मांझी-नीतीश मुलाक़ात और कैबिनेट की बैठक को बहुत महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है.

दूसरी ओर बिहार में सत्तारूढ़ दल जदयू ने भी शनिवार शाम चार बजे पार्टी विधानमंडल दल की बैठक बुलाने की घोषणा कर रखी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार