विश्व कप के भरोसे जालंधर का बल्ला उद्योग

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ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में शुरू होने वाले क्रिकेट विश्व कप में तक़रीबन एक हफ़्ता बाकी हैं. ऐसे में अभी इस बात का सिर्फ अंदाज़ा ही लगाया जा सकता है कि किनके बनाए बल्लों से ज़्यादा रन बनेंगे.

हां, यहां बात हो रही है बल्ला बनाने वाले उस उद्योग की जिनके बल्ले विश्व कप के दौरान चमकेंगे.

राकेश कुमार भी उन दावेदारों में से एक हैं जो उम्मीद करते हैं कि उनके बनाए बल्लों से खूब रन बनेंगे. जालंधर के राकेश के अलावा श्रीनगर और मेरठ के भी कई बल्ला निर्माता इस दौड़ में शामिल हैं.

आस

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राकेश बल्ले को देख कर अंदाज़ा लगाते हैं कि उछाल वाली पिचों पर बल्ले के कौन से हिस्से पर ज़्यादा गेंद आएगी. वे तय कर रहे हैं कि बल्ले के कौन से हिस्से में ज़्यादा वज़न होना चाहिए.

जालंधर में कश्मीर की लकड़ी और बंगाल के बेंत को जोड़ कर राकेश जैसे हज़ारों कारीगर बल्लों का रूप देने में लगे हैं.

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इनके बल्लों से सिर्फ ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में होने वाले अंतरराष्ट्रीय मैचों में ही रन नहीं बनने वाले बल्कि विशव कप का बुख़ार तो हर गांव-शहर में चढ़ने वाला है.

राकेश भारत के अच्छे प्रदर्शन से बहुत उम्मीद लगाए हुए हैं उनका कहना है, "भारत जीतेगा तो हम जी भर कर रोटी खा पाएंगे."

कश्मीर में आई बाढ़ और पंजाब की सर्दी ने राकेश के काम को कुछ मंदा कर दिया है पर वह विश्व कप से इसकी भरपाई की आस लगाए बैठे हैं.

मंदी

खेलों के सामान बनाने वाले डिक्सन ग्रुप के मालिक रविंदर धीर आने वाले विश्व कप के साथ खेल उद्योग की हालत को जोड़कर देखते हैं.

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उनका कहना है,"हम विश्व कप की तैयारी में हैं. जालंधर के खेल उद्योग में मंदी की हालत है. कश्मीर से लकड़ी लाने पर पाबंदी है और हमें ज़्यादा माल वहीं से तैयार करवाना पड़ता हैं. मेरठ में काम बढ़ गया है."

धीर अपने उद्योग और अंतरराष्ट्रीय खेलों का रिश्ता इस तरह देखते हैं, "विश्व कप के दौरान हमारे सामान की मांग बढ़ेगी, लेकिन भारत-पाकिस्तान के मैच से ज़्यादा फर्क पड़ता है. अगर इन दोनों देशों की श्रृंखला हो तो बहुत सामान बिकता हैं, चाहे कोई भी जीते."

इस लिहाज़ से धीर के लिए विश्व कप की शुरुआत अच्छी होने वाली है क्योंकि भारत अपने अभियान की शुरुआत 15 फ़रवरी को पाकिस्तान के साथ पहले मैच से ही करने वाला है.

बिक्री

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जालंधर के खेल उद्योगपति विजय धीर बताते हैं, "हमें उम्मीद है कि हमारी बिक्री दस गुना तक बढ़ेगी."

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Image caption डिक्सन ग्रुप के मालिक रविंदर धीर आने वाले विश्व कप के साथ खेल उद्योग की हालत को जोड़कर देखते हैं.

कुछ अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर भी आ रहे हैं. राकेश हर रोज़ चालीस बल्ले बनाने के साथ भारतीय टीम को लगातार शुभकामनाएं भी दे रहे हैं.

जालंधर खेलों के सामान के निर्यात करने वाला भारत का सबसे बड़ा केंद्र है यहां से पूरे देश का तकरीबन 65 फीसदी निर्यात होता है.

भारत-पाकिस्तान के बंटवारे से पहले सियालकोट एशिया का सबसे बड़ा केंद्र था.

बंटवारे के बाद सियालकोट के बहुत से उद्योगपति जालंधर आ गए जिन्होंने शहर के खेल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय फलक तक पहुंचाया.

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