भारतीयों की 'टैक्स चोरी': चार सवाल

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सोमवार को कई देशों की मीडिया में वो नाम प्रकाशित किए गए जिन पर टैक्स चोरी का आरोप है. इस सूची में उन भारतीयों के नाम भी शामिल हैं जिनके पास एचएसबीसी बैंक की स्विट्ज़रलैंड शाखा में करोड़ों रुपए जमा हैं, कथित तौर पर टैक्स बचाने के लिए.

काला धन भारतीय राजनीति में एक बड़ा मुद्दा रहा है, और एक बार फिर इस सूची को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. इस सूची की गुत्थी को सुलझाते कुछ जवाब:

इस सूची को कैसे खोजी पत्रकारिता के ज़रिए सामने लाया गया?

ये सूची सबसे पहले पेरिस के अख़बार ‘ल मॉन्ड’ को फ्रांसीसी सरकार में मौजूद उनके सूत्रों के हवाले से मिली. चूंकि इस सूची में दुनिया भर से हज़ारों नाम मौजूद थे, इसलिए ‘ल मॉन्ड’ ने वाशिंगटन में स्थित अंतरराष्ट्रीय खोजी पत्रकारिता संघ के साथ मिल कर एक समझौता किया जिसमें 45 देशों से 140 पत्रकारों को इस खोजबीन का हिस्सा बनाया गया.

इन पत्रकारों में लंदन स्थित बीबीसी की टीम भी शामिल थी, जबकि भारत से इंडियन एक्सप्रेस अख़बार को चुना गया. इस संघ ने मिल कर तय किया कि नौ फ़रवरी को विश्व भर में विभिन्न देशों में इस सूची को सार्वजनिक किया जाएगा. बीबीसी ने पाया कि एचएसबीसी बैंक ने कई खाताधारकों को 'टैक्स की चोरी' में मदद की है. एचएसबीसी ने माना है कि कुछ लोगों ने बैंक की गुप्त सेवाओं का लाभ उठाते हुए अघोषित अकाउंट खोले थे.

क्या नया है इस सूची में? भारत से कितने लोग इसमें शामिल हैं?

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साल 2011 में फ्रांस ने भारत को 628 नाम दिए थे, लेकिन इस बार की सूची में इन्हें मिलाकर कुल 1,688 लोगों का नाम सामने आया है जिनमें मुकेश व अनिल अंबानी के नाम भी शामिल हैं.

हालांकि कुछ अकाउंट डुप्लीकेट थे और कुछ उन लोगों के नाम थे जो 1947 के बाद पाकिस्तान जा चुके थे. तीन महीने लंबी खोजबीन के बाद इंडियन एक्सप्रेस इस नतीजे पर आया कि 1,195 भारतीय लोगों का नाम इस सूची में शामिल है.

क्या इन सभी खातों में काला धन ही जमा है?

नहीं. इस सूची में वो नाम भी शामिल हैं जिनके अकाउंट वैध हैं क्योंकि वो भारतीय टैक्स अधिकारियों को सूचित कर खोले गए हैं. और फिर वो नाम तो हैं ही जो अवैध रूप से टैक्स बचाने के लिए खोले गए हैं. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ पिछले महीने तक भारतीय टैक्स प्राधिकारियों ने इन खातों से क़रीब 3,150 करोड़ रुपए टैक्स के रूप में इकट्ठे किए हैं.

भारतीय सरकार का क्या रुख है?

नई सूची सामने आने के बाद भारत सरकार ने कहा है कि काले धन को लेकर पहले से ही जारी जांच के साथ नए नामों की भी जांच की जाएगी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि सभी नामों की जांच की जाएगी लेकिन उन्होंने साथ ही ये चेतावनी भी दी है कि इन खातों में से कुछ वैध भी हो सकते हैं.

एक ख़ास टीम पहले से ही 600 से ज़्यादा लोगों के अंतरराष्ट्रीय खातों की जांच कर रही है, लेकिन अब इस जांच का दायरा बढ़ा दिया जाएगा. नरेंद्र मोदी ने 2014 चुनाव प्रचार के समय में ये वादा किया था कि सत्ता में आने के सौ दिन के भीतर उनकी सरकार काला धन भारत वापस भारत लाएगी, लेकिन उन वादों का कुछ न हो सका.

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