गुजरात: ज़मानत मिलते ही पांडे की बहाली

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बहुचर्चित इशरत जहाँ फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में निलंबित आईपीएस अधिकारी पीपी पांडे को सीबीआई कोर्ट से ज़मानत मिलने के चार दिन बाद गुजरात सरकार ने फिर बहाल कर दिया है.

गुजरात सरकार ने उन्हें अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) का ज़िम्मा सौंपा है.

पीपी पांडे इससे पहले गुजरात में ही अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध) के पद पर कार्यरत थे. उन्हें पद पर रहते ही इशरत जहां मामले में गिरफ्तार किया गया था.

एक की ज़मानत बाक़ी

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पिछले सप्ताह अहमदाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने पीपी पांडे और 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' कहे जाने वाले पूर्व आईपीएस डीजी वंजारा को इशरत जहाँ मामले में ज़मानत दी थी.

पीपी पांडे को एक लाख रुपये के मुचलके पर ज़मानत मिली थी जबकि वंजारा की ज़मानत में यह शर्त रखी गई है कि वह गुजरात नहीं आएंगे.

इशरत जहाँ मुठभेड़ मामले में पकडे गए सात अभियुक्तों में से एनके अमीन के अलावा सभी को ज़मानत मिल गई है.

पांडे को 2013 में गिरफ्तार किया गया था. साल 2003 में अहमदाबाद अपराध शाखा का मुखिया बनने से पहले तक वर्ष 1982 बैच के इस आईपीएस अधिकारी का करियर विवादों से लगभग दूर ही रहा था.

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उनकी अगुवाई में पुलिस की अपराध शाखा ने 11 कथित चरमपंथियों को मुठभेड़ों में मारा था. ऐसे आरोप भी लगे कि इनमें कई मुठभेड़ फ़र्ज़ी थीं. मारे गए कथित चरमपंथियों में इशरत जहाँ और उनके तीन दोस्त भी शामिल थे.

वहीं इस मामले से जुड़े अधिकारी जीएल सिंघल और सोहराबुद्दीन शेख़ मुठभेड़ मामले में गुजरात पुलिस ने अभियुक्त पुलिस अधिकारी राजकुमार पांडियन तथा अभय चुडासमा को भी नौकरी पर बहाल कर दिया गया है.

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