दिल्ली नतीजों पर कांग्रेस में दंगल

  • 13 फरवरी 2015
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दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई थी.

इसका असर अब पार्टी पर दिखने लगा है. कांग्रेस पार्टी के अंदरुनी मतभेद उस समय उभरकर सार्वजनिक हो गए जब पार्टी नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने चुनावों में पार्टी के प्रमुख चेहरे रहे अजय माकन को आड़े हाथों लिया.

इससे बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को कहना पड़ा कि पार्टी नेता खुलेआम तूतू-मैंमैं करने से बचें.

चुनाव में कांग्रेस की रणनीति में कमी होने और ज़िम्मा अजय माकन के कंधों पर होने का ज़िक्र करते हुए शीला दीक्षित ने कहा, ''वो तो कैम्पेन कमेटी के चेयरमेन थे, उनको बहुत एग्रेसिवली करना चाहिए था. हमारी रणनीति में बहुत कमज़ोरियां रह गईं.''

दिल्ली में वर्ष 1998 से 2013 तक 15 साल लगातार कांग्रेस की सरकार जिसकी कमान बतौर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के हाथों में थी. लेकिन हालिया विधानसभा चुनावों में शीला दीक्षित लगभग नदारद रहीं.

कांग्रेस का बचाव

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कमज़ोर रणनीति संबंधी शीला दीक्षित के आरोप पर कांग्रेस नेता पीसी चाको का कहना है, ''मुझे नहीं लगता कि चुनावी मुहिम का नेतृत्व यदि वो करतीं तो चीजें कुछ अलग होतीं. असल में शीला दीक्षित और दिल्ली के सभी कांग्रेस नेताओं को एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने की बजाए हार के कारणों पर मंथन करना चाहिए.''

सोनिया गांधी से मुलाक़ात के बाद पीसी चाको ने कहा, ''पार्टी अध्यक्ष का कहना है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को संयम बरतना चाहिए.''

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दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को 67 सीटें मिली हैं वहीं भारतीय जनता पार्टी को केवल तीन सीटों से संतोष करना पड़ा है. लेकिन 70 सदस्यों वाली दिल्ली विधानसभा में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली.

इस हार पर दिल्ली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली का कहना है कि जो भी कमियां रही हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जाएगा. वे कहते हैं, ''संगठन हमारा नहीं बन पाया था, हम संगठन बनाएंगे. पार्टी नेतृत्व इस बारे में तय करेगा और जो ख़ामियां रही हैं, हम उन पर आपस में विचार-विमर्श करेंगे.''

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