दीपिका, आलिया को हो सकती है जेल!

  • 14 फरवरी 2015
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मुंबई पुलिस ने एआईबी नॉकआउट शो के मामले में दर्शकों पर प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर क़ानून के जानकारों की अलग-अलग राय है.

कुछ मानते हैं कि दर्शक दीर्घा में बैठे कलाकारों, मसलन दीपिका पादुकोण और आलिया भट पर मामला दर्ज नहीं किया जाना चाहिए था.

वहीं कुछ को लगता है कि कलाकारों के ज़रिए इस कार्यक्रम को इंटरनेट पर प्रमोट किया गया, इसलिए ज़िम्मेदारी उनकी भी है.

न आयोजक, न अदाकार

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सोशल मीडिया में कुछ लोग इस तरह के कार्यक्रम और इसमें इस्तेमाल की गई भाषा को अभद्र मानकर इसका विरोध कर रहे हैं तो एक तबक़ा ऐसा भी है जिसका मानना है कि प्राथमिकी दर्ज करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है.

जानी-मानी वकील मीरा भाटिया का कहना है कि दर्शक दीर्घा में बैठे कलाकारों के नाम भी प्राथमिकी में शामिल करना ग़लत है क्योंकि न तो वे आयोजक थे और न कार्यक्रम के अदाकार.

वह कहती हैं, "कार्यक्रम में जो कुछ कहा या दिखाया गया उसके लिए दर्शक ज़िम्मेदार नहीं हो सकते."

साज़िश रचने की धारा सभी 14 अभियुक्तों पर लगाई गई है. मीरा भाटिया कहती हैं कि इस धारा के तहत सज़ा या तो अर्थदंड होती है या फिर छह महीने की क़ैद.

'सब ज़िम्मेदार'

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कार्यक्रम के आयोजकों की दलील है कि यह पूरी तरह निजी कार्यक्रम था जहां विशेष रूप से आमंत्रित श्रोता ही थे इसलिए उन्हें कहने की स्वतंत्रता थी.

मगर साइबर क़ानून के विशेषज्ञ पवन दुग्गल मानते हैं चूंकि जानी-मानी बॉलीवुड की हस्तियों की मौजूदगी में कार्यक्रम के वीडियो को इंटरनेट पर जारी कर भुनाने की कोशिश की गई इसलिए वे भी उतने ही दोषी ठहराए जा सकते हैं जितने कि आयोजक.

इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट का हवाला देते हुए वह कहते हैं, "दर्शक बनकर आए इन बड़े कलाकारों के चेहरे दिखाकर ही आयोजकों ने इंटरनेट पर इस कार्यक्रम को प्रचारित किया. जब कथित तौर पर आपत्तिजनक कार्यक्रम सार्वजनिक हो गया, तो इसके लिए सब ज़िम्मेदार हैं."

वैसे क़ानून के जानकारों का कहना है कि अब यह तो अदालत पर निर्भर है कि नामज़द सभी लोगों पर साज़िश का आरोप बनता है या सिर्फ़ आयोजकों पर.

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