'नीतीश 48 घंटे में मांझी को हटवाना चाहते थे'

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बिहार के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने शुक्रवार को कहा है कि नीतीश कुमार चाहते थे कि 24 या 48 घंटे में मुख्यमंत्री को हटा दिया जाए. यह संविधान के अनुरूप नहीं था.

राज्यपाल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ''नीतीश जो चाहें वह कहने को स्वतंत्र हैं, लेकिन जनता को गुमराह नहीं होना चाहिए.''

राज्यपाल के अनुसार, उन्होंने मांझी को बीस फ़रवरी को बहुमत साबित करने का समय इस कारण दिया, क्योंकि इस दिन सदन की बैठक पहले से ही बुलाई गई थी.

उधर, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने राज्यपाल के इस बयान की आलोचना की है.

जदयू को ऐतराज़

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जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्यपाल संवैधानिक पद की मर्यादा भूल रहे हैं.

वशिष्ठ नारायण ने राज्यपाल को सलाह दी कि उन्हें राजनीतिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए.

इस बीच जदयू ने विजय कुमार चौधरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद दिए जाने के लिए बिहार विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है.

तुरंत इस्तीफ़ा

दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने कहा है कि नीतीश कुमार ने ‘भीष्म पितामह’ बनकर जदयू में हो रहे हर तरह के ग़लत फैसलों से मुंह मोड़ लिया है.

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार ने उन पर भरोसा नहीं कर ग़लती की है.

विश्वास मत हासिल करने के संबंध में उन्होंने कहा कि अगर वे सदन का विश्वास हासिल नहीं कर पाए तो तुरंत इस्तीफा दे देंगे.

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