पाँच साल केवल और केवल दिल्ली: केजरीवाल

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आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने यह साफ़ कर दिया है कि उनकी पार्टी दिल्ली के बाहर फ़िलहाल विस्तार नहीं करेगी. वह ''केवल दिल्ली पर ही ध्यान'' देगी और दिल्ली के विकास के लिए काम करेगी.

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद केजरीवाल ने कहा, “हमारे कुछ साथी अब कहने लगे हैं कि दिल्ली के बाहर दूसरे राज्यों में चुनाव लड़ेंगे. यह उनके अहंकार की निशानी है.”

केजरीवाल के मुताबिक़, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी अहंकार की वजह से ही चुनाव हारीं और इसलिए हमें इससे दूर रहना चाहिए.

केंद्र से टकराव नहीं

केजरीवाल का यह बयान पार्टी के मुख्य सिद्धांतकार माने जाने वाले योगेंद्र यादव के बयान से हटकर है.

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यादव ने बीते दिनों कहा था कि दिल्ली के बाद पार्टी बिहार पर अपना ध्यान केंद्रित करेगी.

चुनाव के ठीक पहले जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी, भाकपा और माकपा ने दिल्ली की जनता से आम आदमी पार्टी को वोट देने की अपील की थी.

चुनाव नतीजों को भाजपा विरोधी नए राजनीतिक समीकरण के रूप में देखा गया था.

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माना जाने लगा था कि आम आदमी पार्टी को भाजपा विरोधी ध्रुव के रूप में आगे बढ़ाकर केंद्र की सत्ता को चुनौती दी जा सकती है.

मिलकर काम करेंगे

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पर केजरीवाल की घोषणा ने इस समीकरण को ख़ारिज कर दिया.

केजरीवाल ने इससे थोड़ा आगे बढ़कर यह ऐलान भी कर दिया कि वह केंद्र सरकार के साथ किसी तरह का टकराव नहीं चाहते.

मुख्यमंत्री ने साफ़ शब्दों में कहा कि वह केंद्र के साथ रचनात्मक सहयोग का रवैया रखेंगे और उनके हर अच्छे काम में सहयोग करेंगे.

पूर्ण राज्य का दर्जा

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केजरीवाल के मुताबिक़ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात के दौरान उनसे कहा कि वह केंद्र सरकार चलाएं और उन्हें दिल्ली की सरकार चलाने दें.

उन्होंने यह भी कहा कि आप और भाजपा दोनों ही दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना चाहती है. यह स्वर्णिम मौका है जब दोनों पार्टियां मिलकर दिल्ली के विकास के लिए काम करेंगी.

दिल्ली में वीआईपी संस्कृति को ख़त्म करने की वकालत करते हुए उन्होंने कहा कि कई यूरोपीय देशों में वहां के प्रधानमंत्री आपको बस स्टैंड पर खड़े दिख जाएंगे.

केजरीवाल ने कहा कि भारत में भी ऐसी ही संस्कृति की ज़रूरत है लेकिन इसमें समय लगेगा.

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