अब 'उपभोक्ताओं के अच्छे दिन' का वादा

रामविलास पासवान

पूंजीवादी व्यवस्था वाले विकसित देशों में कहा जाता है 'कंज़्यूमर इज़ किंग' यानी उपभोक्ता राजा है.

भारतीय उपभोक्ताओं को शायद ऐसा नहीं लगता जब शिकायत करने पर उनकी कोई नहीं सुनता.

केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान की मानें तो अब 'उपभोक्ताओं के अच्छे दिन' आने वाले हैं.

बीबीसी हिंदी हैंगआउट कार्यक्रम में पासवान ने कहा - ''मंत्रालय ने एक उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण या कंज़्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी के गठन की योजना बनाई है जिसे मंज़ूरी के लिए जल्द ही कैबिनेट में भेजा जाने वाला है. इस अथॉरिटी की स्थापना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में संशोधन का हिस्सा है जिसे संसद के अगले अधिवेशन में पेश किया जाएगा.

'फ़ैसला करने के अधिकार'

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उन्होंने कहा कि इस अथॉरिटी के पास कई अहम फैसले लेने का अधिकार होगा.

वह उदाहरण देते हैं कि अगर किसी नई गाड़ी का इंजन खराब निकलता है या पानी की कोई बोतल संक्रमित है तो उस बैच के सभी इंजन और पानी की सभी बोतलों को बाज़ार से वापस कंपनी भेज दिया जाएगा.

उपभोक्ता अदालत में भी बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया गया है.

अब तक इस अदालत का जज रिटायर्ड जज हुआ करता था. अब यूपीएससी के सेवारत अफ़सरों को भी जज बनाया सकता है.

मौजूदा क़ानून में संशोधन लाने के लिए जो दूसरे प्रस्ताव शामिल हैं उनमें जमाखोरी, कालाबाज़ारी और मिलावट करने वालों की सज़ा के समय में बढ़ोतरी शामिल है. जहां तक क्वालिटी कंट्रोल का सवाल है मंत्री ने स्वीकार किया कि भारत में बनी वस्तुओं की क्वालिटी एक मसला है.

"प्रधानमंत्री ने केवल मेक इन इंडिया की बात नहीं कही है बल्कि मेड इन इंडिया पर भी ज़ोर दिया है जिसके लिए क्वालिटी में सुधार लाना ज़रूरी है."

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