बिहार: विश्वास मत से जुड़े 8 अहम सवाल

  • 20 फरवरी 2015
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बिहार विधानसभा में जीतन राम मांझी के विश्वास मत के सवाल पर आम लोगों की काफ़ी दिलचस्पी है.

एक नज़र उन सवालों के जवाब पर.

1- विधानसभा की कार्यवाही के दौरान जीतन राम मांझी की भूमिका क्या होगी?

जीतन राम मांझी को जनता दल (यूनाइटेड) निष्कासित कर चुकी है और वे किसी पार्टी के सदस्य नहीं हैं. बावजूद इसके विश्वास मत के दौरान मांझी सदन के नेता माने जाएंगे.

हालांकि जनता दल (यूनाइटेड) ने नीतीश कुमार को अपना विधायक दल का नेता चुना है लेकिन विश्वास मत का भाषण जीतन राम मांझी सदन के नेता के तौर पर ही देंगे.

2- क्या जीतन राम मांझी को समर्थन हासिल होगा?

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भारतीय जनता पार्टी की बिहार इकाई ने गुरुवार को व्हिप जारी करके अपने 87 विधायकों को विश्वासमत के दौरान जीतनराम मांझी का समर्थन करने को कहा है. ऐसे में मुक़ाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है.

उन्हें मुख्यमंत्री बने रहने के लिए सदन के अंदर 117 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत है.

3- जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक किधर हैं?

बिहार विधानसभा में सबसे ज्यादा 111 विधायक जनता दल (यूनाइटेड) के हैं. इनमें 97 विधायक नीतीश कुमार के खेमे में हैं. माना जा रहा है कि जीतन राम मांझी को 13 विधायकों का समर्थन हासिल है. इनमें से आठ पर पटना हाईकोर्ट ने विश्वास मत के दौरान मतदान करने पर रोक लगा दी है. इसे जीतन राम मांझी के लिए झटका माना जा रहा है.

4- चीफ़ व्हिप कौन होगा?

प्रावधान के मुताबिक़ मुख्यमंत्री सबसे बड़ी पार्टी के विधायक दल के नेता के तौर पर चीफ़ व्हिप को नियुक्त करता है. मांझी ने 7 फरवरी को इस्लामपुर के एमएलए राजीव रंजन को चीफ़ व्हिप बनाया पर विधानसभा अध्यक्ष ने अब तक उसे नोटिफ़ाई नहीं किया.

ऐसे में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले खेमे की स्थिति मज़बूत दिख रही है. नीतीश कुमार के खेमे ने श्रवण कुमार को चीफ़ व्हिप बनाया है लेकिन विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने उन्हें भी नोटिफ़ाई नहीं किया है.

5- क्या सदन के अंदर गोपनीय मतदान होगा?

राज्यपाल ने गोपनीय मतदान का ही सुझाव दिया है, लेकिन क़ानूनी जानकारों के मुताबिक़ यह विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार है.

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अगर विधानसभा अध्यक्ष ने व्हिप को मान्यता दी और दल-बदल निरोधक क़ानून लागू किया तो मांझी के समर्थक जेडीयू विधायक मतदान में हिस्सा नहीं ले पाएंगे. उनकी सदस्यता रद्द हो जाएगी. जबकि गोपनीय मतदान में सदस्यता रद्द नहीं होगी. इसलिए मांझी गुट गोपनीय मतदान की मांग कर रहा है.

6- अगर मांझी अपना बहुमत साबित न कर पाए तो क्या होगा?

अगर मांझी अपना बहुमत साबित न कर पाए, तो राज्यपाल सीधे नीतीश कुमार को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं क्योंकि वे पहले ही सबसे बड़ी पार्टी के विधायक दल के नेता चुने जा चुके हैं.

उन्होंने करीब 130 विधायकों के समर्थन का दावा भी किया है.

7- अगर मांझी को समर्थन हासिल हो गया तब क्या होगा?

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जीतन राम मांझी के लिए ये बड़ी जीत और नीतीश कुमार के लिए हार होगी. जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री तो रहेंगे लेकिन राज्यपाल को यह देखना होगा कि क्या दल-बदल निरोधी क़ानून के तहत मांझी को अपनी पार्टी के अंदर दो-तिहाई विधायकों का समर्थन है और क्या वे नई पार्टी बना सकते हैं. मांझी को पार्टी के अंदर समर्थन नहीं है.

8- क्या राज्यपाल राज्य में राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा कर सकते हैं?

यह फ़ैसला राज्यपाल के हाथों है. नीतीश कुमार सरकार बनाने के लिए अपना दावा पहले ही कर चुके हैं. ऐसे में राज्यपाल नीतीश कुमार को बहुमत साबित करने को कह सकते हैं. राज्यपाल को यह भी ध्यान रखना होगा कि बजट सत्र नज़दीक है.

ऐसे में केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन का प्रस्ताव संसद के अंदर पारित कराना होगा. राज्य चुनाव में अभी आठ महीने बाक़ी हैं, लिहाजा राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा से बचना चाहेंगे.

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