'समर्थक विधायकों को मौत की धमकियां मिलीं'

  • 20 फरवरी 2015
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बिहार विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव का सामना करने से पहले इस्तीफ़ा देने वाले मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि उनके समर्थक विधायकों को जान से मारने की धमकियां दी गईं.

राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को अपना इस्तीफ़ा सौंपने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने ये आरोप लगाए.

उन्होंने कहा कि उनके विधायकों के घरों पर अज्ञात लोग निगरानी कर रहे थे.

विधानसभा अध्यक्ष का आचरण

उन्होंने कहा, ''मुझे विधानसभा अध्यक्ष के आचरण पर भरोसा नहीं था. मुझे डर था कि विधानसभा में कुछ अनहोनी हो सकती है. हमारे समर्थक विधायकों को बैठने नहीं दिया जा सकता है.''

मांझी का कहना था कि उन्हें खुलकर काम नहीं करने दिया गया. यहां तक कि मंत्रिमंडल गठन में भी उनकी राय नहीं ली गई.

उन्होंने कहा, ''मेरे पास तबादलों की सूची आती थी और उस पर मुझे बेमन से दस्तख़त करने पड़ते थे.''

स्थानीय पत्रकार मनीष शांडिल्य के मुताबिक़, जनता दल यूनाइटेड के मांझी गुट के मुख्य सचेतक राजीव रंजन ने संवाददाताओं को बताया, ''मुख्यमंत्री मांझी ने इस्तीफ़ा दे दिया है. वे अब विधानसभा नहीं जाएंगे.''

वहीं मांझी समर्थक विधायक नरेंद्र सिंह ने कहा कि विधानसभा में मांझी समर्थक विधायकों के बैठने की व्यवस्था नहीं थी.

विधानसभा में मांझी आज ही विश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले थे.

'जोड़तोड़ की कोशिश'

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मांझी के इस्तीफ़े की ख़बर आने के बाद नीतीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ''यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था. सरकार बनाने के लिए जोड़तोड़ की पूरी कोशिश की गई. इसमें सफलता न मिलने पर मुख्यमंत्री ने इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया. भाजपा का गेम प्लान एक्सपोज़ हो गया.''

वहीं मांझी के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि कौरवों ने अभिमन्यु का वध कर दिया है. उन्हों जदयू, राजद और कांग्रेस को कौरव और मांझी को अभिमन्यु बताया.

यादव ने कहा, ''मांझी के इस्तीफे से जदयू, राजद और कांग्रेस का दलित विरोधी चेहरा उजागर हुआ है. भाजपा ने एक गरीब और महादलित समाज से आने वाले व्यक्ति के साथ खड़े होने का फैसला किया था.''

मांझी को समर्थन देने के फ़ैसले बचाव करते हुए यादव ने कहा कि भाजपा का फ़ैसला ग़लत नहीं था. बहुमत का जुगाड़ करना मांझी की जिम्मेदारी थी. पार्टी मांझी के इस्तीफे और अपने फैसले से निराश नहीं है.

यादव ने कहा कि भाजपा समय पूर्व चुनाव नहीं चाहती है और वह सूबे में नई सरकार के गठन के पक्ष है. उन्होंने वर्तमान राजनीतिक संकट के लिए नीतीश कुमार जिम्मेवार बताया.

माझी का सफ़र

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Image caption लोकसभा चुनाव में जदयू को मिली करारी हार के बाद नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया था.

बीते साल लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार ने हार की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

इसके बाद उनकी सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया गया था.

लेकिन कुछ दिनों पहले जनता दल यूनाइटेड ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देते हुए मांझी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था.

इसके बाद से ही राज्य में सरकार बनाने और बचाने की लड़ाई सड़क से लेकर अदालत तक चल रही थी.

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