सीपीआई नेता गोविंद पांसरे की मौत

  • 21 फरवरी 2015

अज्ञात हमलावरों की गोलियों के शिकार बने महाराष्ट्र के वरिष्ठ सीपीआई नेता गोविंद पांसरे की मौत हो गई है. पिछले दिनों 16 फ़रवरी को कोल्हापुर में कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें गोली मार दी थी.

गंभीर हालत में शुक्रवार को उन्हें एयर एम्बुलेंस के ज़रिए मुंबई लाकर ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन शुक्रवार को रात 12 बजे के आसपास उन्होंने आख़िरी सांस ली.

गोविंद पांसरे और उनकी पत्नी पर कोल्हापुर में उस समय जानलेवा हमला हुआ था जब दोनों सुबह टहलने जा रहे थे.

पांसरे पिछले कुछ दिनों से कोल्हापुर में चल रहे टोल विरोधी आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थे.

Image caption पांसरे पर हमले की चारों ओर निंदा हो रही थी

सोमवार की सुबह कोल्हापुर में अपनी पत्नी के साथ टहलने निकले पानसरे पर दो हमलावरों ने गोलियां चलाईं.

हमले में उनकी पत्नी भी घायल हुई थीं जिनका कोल्हापुर में इलाज चल रहा है. उनकी पत्नी की हालत भी गंभीर है. पुलिस की तफ़्तीश जारी है लेकिन हमलावर अभी तक नहीं पकड़े गए हैं.

दाभोलकर की याद ताज़ा

पांसरे की मृत्यु ने 20 अगस्त 2013 को पुणे में हुई डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की हत्या की याद जगा दी. डॉ. दाभोलकर अंधविश्वास विरोधी आंदोलन का चेहरा थे.

सांप्रदायिक ताक़तों के विरोध में वे मुखर थे. दाभोलकर भी सुबह टहलने के लिए निकले थे जब उनपर क़रीब से गोलियां चलाई गई थीं. उनके हमलावर अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं.

पांसरे भी पिछले 50 वर्षों से प्रगतिशील आंदोलन के मुखिया रहे हैं. सांप्रदायिकता के विरोध में भी वे काफ़ी सक्रिय थे. हाल ही में नथूराम गोडसे का महिमामंडन किए जाने को लेकर भी उन्होंने कड़ा एतराज़ जताया था.

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