'स्मार्ट सिटी से रोज़गार की आस'

विवेक कुमार, कानपुर, यूपी, भारत इमेज कॉपीरइट Rohit Ghosh
Image caption विवेक कुमार ने एमबीए किया लेकिन उन्हें मनपसंद नौकरी नहीं मिली.

कानपुर में रहने वाले 24 साल के विवेक कुमार ने एमबीए के लिए बैंक से दो लाख रुपए क़र्ज़ लिया. इस पर उन्हें अब 20 हज़ार रुपए महीने का ब्याज चुकाना है.

विवेक कुमार ने समझा था कि एमबीए करने के तुरंत बाद उन्हें नौकरी मिल जाएगी और वह आसानी से ब्याज समेत क़र्ज़ चुकाते रहेंगे पर ऐसा नहीं हुआ.

विवेक महीनों से बेरोज़गार हैं और उनके पिता ब्याज भर रहे हैं. निकट भविष्य में उन्हें इस एमबीए की डिग्री के आधार पर कोई नौकरी मिलने की उम्मीद नज़र नहीं आ रही है.

ग़लत फ़ैसला

विवेक को लगता है कि उनका एमबीए करने का फ़ैसला ग़लत था. वे मानते हैं कि इसके बजाय उन्हें सरकारी नौकरी पाने की कोशिश करनी चाहिए थी.

वह कहते हैं, "आजकल एमबीए का दौर है. हर आदमी एमबीए करके बड़ी-बड़ी तनख्वाह पा रहा है. लिहाज़ा, मैंने भी एमबीए में दाखिला ले लिया था."

विवेक कुमार ने 2012 में कानपुर के एक प्राइवेट कॉलेज कानपुर इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में दाखिला लिया था.

विवेक के पिता देवनाथ का कानपुर में ही छोटा कारोबार है. एमबीए की पढ़ाई के लिए पैसे पूरे हो नहीं रहे थे इसीलिए उन्हें बैंक से क़र्ज़ लेना पड़ा.

पढ़ाई के बाद विवेक कई कैंपस इंटरव्यू में शामिल हुए, पर उन्हें नौकरी नहीं मिली.

कई काम

कानपुर चमड़ा उद्योग का बड़ा केंद्र है. यहां क़रीब 200 टैनरी हैं. उन्होंने एक टैनरी में काम करना शुरू किया. पसंद नहीं आया तो उन्होंने दूसरी टैनरी में काम पकड़ा. वहां भी उनका मन नहीं लगा. उसके बाद विवेक ने कई टैनरी में काम किया.

आखिरकार उन्होंने सोचा कि वे टैनरी में काम करने लायक हैं ही नहीं और एक बड़े बैंक में नौकरी शुरू की.

विवेक कहते हैं, "मुझे आईसीआईसीआई बैंक में नौकरी मिली. काम था लोगों को बीमा पॉलिसी बेचना, पर मेरा स्पेशलाइज़ेशन स्टॉक मार्केट में था. मैं कहां से पॉलिसी बेच पाता. काम का बोझ भी बहुत ज़्यादा और तनख़्वाह सिर्फ़ आठ हज़ार. ब्याज का आधा भी नहीं. तो वह नौकरी भी छोड़ दी. अभी बेरोज़गार हूं."

पछतावा

विवेक को अब अपने एमबीए करने पर अफ़सोस होता है.

वह कहते हैं, "एमबीए करना मेरी एक भूल रही. मुझे अब सरकारी नौकरी की प्रवेश परीक्षाओं में बैठना है. अगर मुझे एमबीए ही करना था तो किसी बड़े कॉलेज में दाखिला लेना चाहिए था."

विवेक ने कहा, "मेरी इच्छा है मैं कानपुर में रहकर ही अच्छी नौकरी करूं पर मेरा वह सपना शायद पूरा न हो पाए. फिर तो अपना घर छोड़ना ही पड़ेगा."

मोदी सरकार का पहला बजट आने वाला है. विवेक उस बजट में थोड़ी सी उम्मीद देख रहे हैं.

विवेक कहते हैं, "नरेंद्र मोदी ने कहा है कि स्मार्ट सिटीज़ बनाएंगे. अगर कानपुर स्मार्ट सिटी बन जाए तो अच्छा है. मुझे शायद यहीं अच्छी नौकरी मिल जाए."

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