महामारी का रुप ले रहा है स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू इमेज कॉपीरइट ANKUR JAIN

स्वाइन फ़्लू महामारी का रूप ले चुका है, पर स्वास्थ्य अधिकारी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं.

इस साल जनवरी से लेकर 25 फ़रवरी तक इस बीमारी से 1,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 16,000 से ज़्यादा प्रभावित हैं.

गुजरात में इसका सबसे अधिक असर देखा जा रहा है. यहां स्वाइन फ़्लू से अब तक 231 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,700 से ज़्यादा लोग संक्रमित पाए गए हैं.

पढ़ें विस्तार से

इमेज कॉपीरइट AP

इस बीमारी पर क़ाबू पाने के लिए गुजरात के तीन शहरों- अहमदाबाद, भावनगर और राजकोट में एक जगह बड़ी तादाद में लोगों के इकट्ठा होने पर धारा 144 के तहत पाबंदी लगा दी गई है.

इसके बाद गुजरात में होने वाले कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं.

इमेज कॉपीरइट EPA

अहमदाबाद में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम अमूमन होते हैं लेकिन स्वाइन फ़्लू की वजह से इन पर फ़िलहाल रोक लगा दी गई है.

हर 26 फ़रवरी को अहमदाबाद में इस शहर का स्थापना दिवस मनाया जाता है, पर इस साल इन कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है.

कई कार्यक्रम रद्द

इमेज कॉपीरइट ANKUR JAIN

शहर में पिछले 12 साल से हो रही चैरिटी वॉक उन कार्यक्रमों में एक है. इसके संयोजक कौशल मेहता के मुताबिक़, "इसमें तक़रीबन पांच हज़ार लोग हिस्सा लेते हैं. इस आदेश और स्वाइन फ़्लू के ख़तरे को देखकर हमने एक मार्च को होने वाले इस वॉक को रद्द कर दिया है."

वहीं कई संगीत और धार्मिक कार्यक्रमों को भी इस आदेश के बाद रद्द कर दिया गया है. हालांकि, शादी और मैयत के जुलूस नियमों के दायरे से बाहर रहेंगे.

लेकिन इस आदेश से बहुत से लोग असमंजस में पड़ गए हैं.

अहमदाबाद चाय की दुकानों के लिए जाना जाता है और नौजवानों के इकट्ठा होने की ये पसंदीदा जगहें होती हैं.

'स्वाइन फ़्लू वैकेशन’

इमेज कॉपीरइट ANKUR JAIN

यहां दोस्तों से अक्सर मिलने पहुंचने वाले राजेश पटेल कहते हैं, “हम असमंजस में हैं कि क्या यहां इकट्ठा होने से पुलिस रोकेगी, लेकिन हमें पता चला है कि यह पाबंदी केवल बड़े जमावड़े के लिए ही है.”

वह कहते हैं, “लेकिन यदि फ़्लू फैलता है तो हम इकट्ठा नहीं हो पाएंगे.”

डॉक्टरों का मानना है कि जैसे ही गर्मियों में तापमान बढ़ेगा, इसका असर कम हो जाएगा. इस बीच, कुछ निजी स्कूल और कॉलेजों ने ‘स्वाइन फ्लू वैकेशन’ घोषित कर दी हैं.

अहमदाबाद में अधिकांश लोग वायरस से बचाव के लिए ऐसे घरेलू नुस्ख़ों का प्रयोग कर रहे हैं, जिनके असर के बारे में कोई साक्ष्य नहीं है कि ये काम भी करते हैं.

घरेलू नुस्ख़े

इमेज कॉपीरइट ANKUR JAIN

बिंदिया शाह ने कपूर और इलायची के मिश्रण वाले 20 से अधिक पैकेट अपने परिजनों और दोस्तों को दिए हैं.

वह कहती हैं, “व्हाट्स ऐप पर स्वाइन फ़्लू के बचाव वाली घरेलू दवा के बारे में मुझे कई संदेश मिले थे. यहां तक कि मेरे दोस्त डॉक्टरों ने भी इन्हें भेजा था, तो यह सही ही होगा.”

शाह कहती हैं कि उन्होंने यह संदेश अपने 100 से अधिक दोस्तों को भेजे हैं और वो इसे इस्तेमाल भी कर रहे हैं.

कई लोग ऑफ़िस जाते समय, ड्राइविंग करते हुए या चलते हुए मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं.

दवाओं की किल्लत

इमेज कॉपीरइट AP

दवा विक्रेता हर्ष पांचाल कहते हैं, “हमने पिछले 15 दिनों में 200 से अधिक मास्क बेचे हैं. एक मास्क की क़ीमत 30 से 200 रुपए तक है.”

उन्होंने कहा, “इस वायरस से बचाव करने वाला विशेष मास्क उपलब्ध नहीं है, इसलिए हम सामान्य मास्क ही बेच रहे हैं.”

डॉ. हेमंत पटेल कहते हैं, “दवाओं की भारी कमी है. सरकारी और निजी अस्पतालों में स्टॉक ख़त्म हो चुका है. फ़ार्मा कंपनियां इसका फ़ायदा उठाने के लिए दवाओं की कृत्रिम कमी पैदा कर रही हैं. यह आपातकालीन स्थिति है. जैसे ही तापमान बढ़ेगा वायरस का असर कम हो जाएगा.”

(सोशल मीडिया जैसे फ़ेसबुक और ट्विटर पर आप हमें फ़ॉलो कर सकते हैं. बीबीसी हिन्दी का एंड्रॉएड के लिए यहां क्लिक करें.)

संबंधित समाचार