'मेक इन इंडिया में भारत के बच्चे कहां हैं'

  • 1 मार्च 2015
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आम बजट पर उद्योग जगत से लेकर आम आदमी की अपेक्षाओं की खूब चर्चा हो रही है, पर क्या बच्चों के लिए भी कुछ ख़ास है इस बजट में?

यह जानने के लिए बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने बात की बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले ग़ैरसरकारी संगठन 'हक़' की सह निदेशक इनाक्षी गांगुली ठुकराल से.

बच्चों के लिए इस बजट में क्या?

इनाक्षी: बजट में बच्चों के लिए कुछ नहीं है. बजट में बच्चों की योजनाओं के लिए आवंटित राशि में क़रीब 30 प्रतिशत तक की कमी हुई है.

साथ ही केंद्रीय बजट में बाल योजनाओं का हिस्सा पिछले साल के मुक़ाबले 30 प्रतिशत तक घट गया है. पिछले साल यह हिस्सा 4.52 प्रतिशत था जो इस साल घटकर तीन प्रतिशत रह गया है.

किन योजनाओं में कटौती हुई?

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इनाक्षी: सर्वशिक्षा अभियान, माध्यमिक शिक्षा के कार्यक्रम, नेशनल रूरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) सभी योजनाओं में कटौती हुई है.

बजट से क्या उम्मीदें थीं?

इनाक्षी: मुझे उम्मीद थी कि कम से कम बच्चों के कुपोषण की बात तो ज़रूर की जाएगी, लेकिन वित्त मंत्री के भाषण में इसका कहीं जिक्र नहीं हुआ. उनके भाषण में औरतों और बच्चों के लिए केवल एक लाइन में एक साथ बोल दिया गया.

हालाँकि हर साल के भाषण में हम बच्चों से जुड़े मुद्दों जैसे- कुपोषण, बीमारी, सुरक्षा, शोषण, उत्पीड़न, तस्करी आदि को अवश्य सुनते हैं लेकिन इस बार केवल स्किल इंडिया, ग्रीन इंडिया, मेक इन इंडिया को छोड़कर कुछ सुनाई नहीं दिया.

तो अब सवाल यह उठता है कि इस स्किल इंडिया, ग्रीन इंडिया और मेक इन इंडिया में भारत के बच्चे कहां हैं?

क्या आपको ज़्यादा निराशा हुई?

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इनाक्षी: हालाँकि पिछले दो-तीन साल के बजट देखें तो बच्चों के शेयर में कटौती हुई थी, लेकिन वास्तविकता में राशि में बढ़ोतरी हुई थी. इस बार तो योजनाओं के लिए आवंटित राशि में ही कटौती दिखाई दे रही है.

बच्चों के लिए कुल कितनी कटौती हुई?

इनाक्षी: बच्चों के लिए स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों में 22 प्रतिशत तक और शिक्षा कार्यक्रमों में 25 प्रतिशत तक कटौती हुई है.

इसके अलावा अहम बात यह है कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के कुल बजट में ही 55 प्रतिशत की कटौती हुई है.

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