केजरीवाल को हटाने की कोशिश हो रही है: आप

  • 2 मार्च 2015
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आम आदमी पार्टी ने माना है कि अरविंद केजरीवाल को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाने की कोशिशें हो रही हैं.

पार्टी के नेता संजय सिंह ने दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेस में ये बात कही. हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि ऐसी कोशिशें कौन कर रहा है.

संजय सिंह ने कहा कि पार्टी नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के साथ अरविंद केजरीवाल के कथित मतभेद की ख़बरों से कार्यकर्ताओं और लोगों के बीच ग़लत संदेश जा रहा है.

चिट्ठी पर विवाद

संजय सिंह से जब पूछा गया कि क्या योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को 'आप' से निकाला जाएगा तो उन्होंने कहा, "किसी को पार्टी में शामिल करने का फ़ैसला या निकालने का निर्णय पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में होता है और चार तारीख़ को इस बैठक के बाद आपको पता चल जाएगा कि क्या होगा."

मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक़ योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण कथित तौर पर अरविंद केजरीवाल के राष्ट्रीय संजोयक पद पर बने रहने के पक्ष में नहीं हैं.

प्रशांत भूषण ने कथित तौर पर इसे लेकर पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी को चिट्ठी भी लिखी थी.

'मज़ाक बना'

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संजय सिंह ने कहा, "सब जैसे मज़ाक बनकर रह गया है. जिसका मन होता है वो चिट्ठियां मन माफ़िक तरीके से लीक कराता है. मीडिया में इधर उधर की बातें फैलाई जाती हैं."

वहीं माना जा रहा है कि कश्मीर सहित कई मुद्दों पर केजरीवाल और प्रशांत भूषण के अलग-अलग विचार हैं.

पार्टी के एक और सदस्य आशुतोष ने सोमवार को ट्वीट कर कहा, "आप में मंथन का वक़्त. ये दो तरह के विचारों के बीच मतभेद है. एक तरफ़ हैं कट्टर वामपंथी विचारधारा जो कश्मीर में जनमत संग्रह की बात करती हैं तो दूसरी ओर विकास में यक़ीन करने वाली विचारधारा."

योगेंद्र और प्रशांत की प्रतिक्रिया

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इससे पहले आप में मतभेद की ख़बरों पर योगेंद्र यादव ने ट्वीट किया था, "मेरे और प्रशांत के बारे में तरह-तरह की ख़बरें चल रही हैं. बेवजह के आरोप लगाए जा रहे हैं. मैं इन सबको देखकर कभी हंसता हूं तो कभी मुझे दुख भी होता है. दिल्ली में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद हमें छोटे-मोटे मतभेदों को भुलाकर बड़े दिल से काम करना होगा."

वहीं प्रशांत भूषण ने इस मामले में कोई बयान देने से इनकार करते हुए कहा था, "ये सब पार्टी के अंदरूनी मामले हैं. मैं सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोलूंगा. मैंने पार्टी के ढांचे में बदलाव को लेकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी को एक ख़त लिखा था. इसे विद्रोह की तरह नहीं देखा जाना चाहिए."

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