'जिहादी जॉन को अकेले रहना पसंद था'

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चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के वीडियो में अक्सर दिखने वाले 'जिहादी जॉन' यानी मोहम्मद एमवाज़ी से मिल चुके एक पूर्व चरमपंथी का कहना है कि वो शुरू में सामान्य से व्यक्ति थे जिन्हें अकेले रहना पसंद था.

मोहम्मद एमवाज़ी की पहचान पिछले दिनों ही हुई है और उनका परिवार ब्रिटेन में रहता है.

आईएस छोड़ने वाले एक पूर्व चरमपंथी ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में कहा कि एमवाज़ी का अन्य ब्रितानी जिहादियों के साथ भी मेलजोल नहीं था, इसीलिए उन्हें सीरिया में 'अकेले रहने वाला' कहा जाता था.

साल 2012 में सीरिया के एटमे रिफ़्यूजी कैम्प के आसपास के इलाक़ों में बड़ी संख्या में विदेशी लड़ाके आए थे, जिनमें काफ़ी लोग ब्रिटेन से थे. एमवाज़ी भी इस कैम्प में थे.

'जिहादी जॉन का इस्तेमाल'

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पूर्व चरमपंथी ने बताया कि एमवाज़ी सिर्फ़ अपने दोस्तों के साथ ही नमाज़ पढ़ते थे. यही नहीं, जब दूसरे ब्रितानी एक दूसरे से दुआ-सलाम करते थे, तो एमवाज़ी मुंह फ़ेर लिया करते थे.

उन्होंने बताया कि 'जिहादी जॉन' में 'कोई ख़ास बात नहीं थी. कोई भी उसकी तरह बन सकता था. आईएसआईएस के पास पेशेवर मनोवैज्ञानिक हैं जो चुनते हैं कि किस से क्या काम लेना है'.

सूत्र बताते हैं कि जब 'जिहादी जॉन' से महिलाओं और बच्चों का क़त्ल करने को कहा गया तो उन्होंने आईएस को छोड़ दिया.

पूर्व आईएस सदस्य के अनुसार कई लोग एमवाज़ी को मिसाल के रूप में देखते हैं और कुछ उनसे उत्साहित होकर आईएसआईएस से जुड़े भी जबकि लेकिन कइयों को लगता है कि आईएसआईएस ने एमवाज़ी का इस्तेमाल किया.

पूर्व चरमपंथी ने कहा कि आईएसआईएस एक पियानो की तरह एमवाज़ी का इस्तेमाल करती है. एक बहादुर लड़ाके की तरह एमवाज़ी के नाम को पेश किया जाता है ताकि दूसरे यूरोपीय लोगों को सीरिया में लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए उत्साहित किया जा सके.

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