क्रिकेट में बढ़ते दाढ़ी वाले खिलाड़ी

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दक्षिण अफ़्रीका के हाशिम अमला जब आयरलैंड के गेंदबाज़ों की धुनाई कर रहे थे तब टीवी स्क्रीन पर उनकी बैटिंग के बजाय मेरी निगाह बार-बार उनकी लम्बी दाढ़ी पर जा रही थी.

ओवरों के बीच जब भी वो अपना हेलमेट सिर से हटाते उनकी लम्बी दाढ़ी पर नज़र ज़रूर जाती और मैं सोचता कि इतनी लम्बी दाढ़ी वाला इंसान दयालु क्यों नहीं है.

बचपन में मेरे पड़ोस में एक अंकल की दाढ़ी भी ऐसी ही लम्बी थी लेकिन वो तो बहुत दयालु थे.

रोज़े में क्रिकेट

कुछ दिन पहले एक और दाढ़ी वाले क्रिकेटर इंग्लैंड के मोईन अली ने भी स्कॉटलैंड के गेंदबाज़ों के साथ इसी तरह का सुलूक किया था जब चौकों और छक्कों की बौछार से उन्होंने एक शानदार शतक बनाया था.

अमला और मोईन दोनों पक्के मुसलमान हैं. पांचों वक़्त नमाज़ पढ़ते हैं और यहाँ तक कि रमज़ान में भी रोज़ा रख कर क्रिकेट मैच खेलते हैं.

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Image caption मोईन अली कह चुके हैं कि उनका धर्म खेल में भी उनकी मदद करता है

तो क्या दाढ़ी और धर्म इनकी घातक बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी में मदद करते हैं? मोईन ने पिछले साल बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में ये स्वीकार किया था कि उनका धर्म उन्हें क्रिकेट के मैदान में खेल पर फ़ोकस रखने में मदद करता है.

ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में चल रहे आईसीसी विश्वकप में 14 टीमें भाग ले रही हैं जिनमें इन दोनों खिलाड़ियों के अलावा कई और दाढ़ी वाले क्रिकेटर्स फील्ड में नज़र आते हैं.

दक्षिण अफ्रीकी टीम में हाशिम अमला के अलावा तीन और मुसलमान खिलाड़ी हैं - इमरान ताहिर, फरहान बेहरुद्दीन और वेन पर्नेल जिन्होंने 2011 में इस्लाम धर्म को क़बूला.

शर्ट पर लोगो नहीं

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Image caption इमरान ताहिर दक्षिण अफ्रीकी टीम के गेंदजबाज़ी आक्रमण का हिस्सा हैं

ये चारों मुसलमान क्रिकेटर टीम स्पॉन्सर 'कासल बियर' का लोगो अपनी शर्ट पर नहीं लगाते हैं क्योंकि उनके धर्म में शराब हराम है.

इंग्लैंड के मोईन अली जब पिछले साल भारत के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज में नमूदार हुए तो उनकी बढ़िया बल्लेबाज़ी और गेंदबाज़ी से अधिक चर्चा उनकी छाती तक आती दाढ़ी की हुई.

इंग्लैंड में वो वर्सेस्टरशायर काउंटी के लिए खेलते हैं जहाँ उन्हें नमाज़ पढ़ने के लिए मैनेजमेंट ने अलग से जगह दे रखी है.

यूँ तो क्रिकेट में सबसे जानी मानी हस्ती 19वीं शताब्दी के डब्ल्यूजी ग्रेस की दाढ़ी काफ़ी लम्बी थी लेकिन मौजूदा दौर में लम्बी, धार्मिक दाढ़ी का सिलसिला पाकिस्तान की टीम से शुरू हुआ.

'नमाज़ के लिए डांट'

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आशीष शुक्ल तीन दशकों से क्रिकेट मैचों को कवर करते आ रहे हैं. उनके अनुसार इमरान ख़ान की कप्तानी में पाकिस्तानी टीम 'सेक्युलर' हुआ करती थी लेकिन जब से इंज़माम उल हक़ कप्तान बने तो दाढ़ी का सिलसिला शुरू हो गया.

वो बताते हैं, "इंज़माम, सईद अनवर से काफ़ी प्रभावित थे जो कट्टर मुस्लिम हो चुके थे और लम्बी दाढ़ी रखने लगे थे."

आशीष कहते हैं, "लंच ब्रेक में इंज़माम सबको नमाज़ पढ़ने पर मजबूर करते थे. एक बार का वाक़या है जब उनके सामने इंज़माम ने अनिच्छुक बल्लेबाज़ इमरान फ़रहत को नमाज़ पढ़ने के लिए डांट कर बुलाया."

कहते हैं कि यूसुफ़ योहाना को 2005 में इस्लाम क़बूल कराने में सईद अनवर ने अहम भूमिका निभाई थी.

सईद अनवर, इंज़माम और यूसुफ़ दूसरी टीमों के खिलाडियों को भी इस्लाम की दावत देते थे. आशीष कहते हैं कि एक बार इंज़माम और यूसुफ़ ब्रायन लारा को सईद अनवर के पास लाए जिन्होंने लारा को इस्लाम धर्म में आने की दावत दी.

'युवा खिलाड़ी प्रेरित'

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Image caption अफ़रीदी पाकिस्तान के हरफ़नमौला क्रिकेटर हैं

एक ज़माने में सईद अनवर क्लीन शेव खिलाड़ी थे, लेकिन कहते हैं कि उनकी बेटी के देहांत के बाद वो धार्मिक हो गए.

धार्मिक दाढ़ी में भी अलग-अलग स्टाइल है. आज की पाकिस्तानी टीम के सबसे जाने-माने खिलाड़ी शाहिद अफ़रीदी लम्बी दाढ़ी नहीं रखते.

पाकिस्तान के सबसे सफल स्पिनर सक़लैन मुश्ताक़, पूर्व स्पिनर मुश्ताक़ अहमद, सईद अनवर और यूसुफ की दाढ़ियाँ लम्बी हैं और मूंछें साफ़ हैं.

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आशीष शुक्ल कहते हैं कि ये खिलाड़ी दाढ़ी से अपनी धार्मिक पहचान बनाते हैं.

कुछ खिलाड़ी जैसे इंज़माम और अफ़रीदी मूंछ और दाढ़ी दोनों रखते हैं. मोईन और अमला ने कई युवा खिलाडियों को प्रेरित किया है.

उनकी क्रिकेट के मैदान में कामयाबी और उनके साफ़-सुथरे निजी जीवन को देखते हुए ये अनुमान लगाया जा सकता है कि क्रिकेट और दाढ़ी का साथ आगे भी चलने वाला है.

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