दूल्हा वही जो दुल्हन मन भाए...

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भारत में जहां लड़कियों की शादी के लिए आमतौर पर माता पिता ही योग्य वर की तलाश करते हैं, वहीं बेंगलुरु की रहने वाली इंदुजा पिल्लै ने एक अनोखी मिसाल पेश की है.

टॉमब्यॉय जैसी दिखने वाली 24 साल की इंदुजा पिल्लै के माता-पिता ने उनकी शादी के लिए वैवाहिक विज्ञापन यानि मैट्रिमोनियल दिया.

'सपनों के राजकुमार' के बारे में एकदम अगल तरीके से सोचने वाली इंदुजा को ये पसंद नहीं आया. उन्होंने अपना दूसरा मैट्रिमोनियल खुद तैयार किया.

इंदुजा का ये मैट्रिमोनियल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. इसके बाद उनके पास थोक के भाव से शादी के प्रस्ताव आने लगे.

पढ़ें इंदुजा की कहानी, उन्हीं की जुबानी

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मेरे परिवार वाले मेरी शादी के लिए बड़े चिंतित थे.

एक दिन मां और पापा ने बताया कि उन्होंने मेरी प्रोफ़ाइल एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर डाली है. पापा ने मुझे उसका लिंक भी भेजा.

इंदुजा का ब्लॉग

मैट्रोमोनियल में लिखा था, "हमें अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटी के लिए एक लड़का चाहिए."

मेरे माता-पिता मेरे लिए वर ढूंढें इससे मुझे कोई ऐतराज नहीं था. भारत में आमतौर पर बेटियों की शादी के लिए उनके माता पिता ही योग्य वर यानि लड़के की तलाश करते हैं.

लेकिन मैट्रिमोनियल में मेरे बारे में दी गई शुरुआती जानकारी पर ऐतराज जरूर था.

मैं कोई सॉफ्ट इंजीनियर नहीं हूं. मैं तो स्टॉर्ट्अप और छोटी कंपनियों के लिए काम करती हूं.

फिर मैंने तय किया कि अपना मैट्रिमोनियल खुद तैयार करूंगी और इस तरह अपनी एक प्रोफाइल बनाई.

जनाना गुण

माता-पिता की ओर से दिए गए मैट्रिमोनियल में मेरे धार्मिक रुझान, शौक या रुचियों के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया था.

मैंने लिखा, "मैं शराब नहीं पीती, मुझे सिगरेट से नफ़रत है. मैं 'अंडाहारी' हूं, खाने-पीने का कोई शौक नहीं. बैडमिंटन खेलती हूं और खूब नाचती हूं. चश्मा पहनती हूं लेकिन चश्मे में बुद्धू लगती हूं. मुझे फालतू खर्च करना नहीं आता और न ही शॉपिंग की दीवानी हूं. मसाला और ड्रामा नहीं चाहिए मुझे, टीवी के पीछे पागल नहीं हूं. पढ़ने का तो कतई शौक नहीं. दोस्ताना व्यवहार है, लेकिन दोस्ती पसंद नहीं. लड़की हूं लेकिन जनाना कहे जाने वाले कोई गुण नहीं हैं. ये कहा जा सकता है कि शादी के लिए ज़रूरी आदर्श गुण नहीं. मैं कभी भी बाल लंबे नहीं करूंगी. हां, उम्र भर के लिए अपनी गारंटी जरूर दे सकती हूं... जीवन के प्रति सच्ची और समर्पित हूं."

तो अब सवाल ये है कि मुझे कैसा लड़का चाहिए. लड़का ऐसा हो जिसमें ये खास बाते हों, "एक इंसान हो, यदि दाढ़ी वाला हो तो ज़्यादा अच्छा है, दुनिया को देखने का जोश हो. परिवार वालों के साथ मिल कर चलता हो. पारिवारिक व्यक्ति ना हो तो बेहतर. एक और बहुत ज़रूरी बात कि उसे बच्चे पसंद न हों. शख्सियत आकर्षक हो."

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मैं खुद को एक व्यक्ति, एक इंसान के रूप में देखती हूं. जानती हूं कि मैं कौन हूं, मैं एक खानाबदोश हूं जिसे अपने शहर में भटकना पसंद है. सबसे अलग हूं.

तो अब इस इंदुजा से कौन शादी करना चाहेगा?

दिलचस्प प्रस्ताव

मेरे इस मैट्रिमोनियल के इतने जवाब आए जिसका मुझे बिलकुल अंदाज़ा नहीं था. फरवरी में इसने ट्रेंड करना शुरू किया और अब यह चरम पर है.

मुझसे शादी के लिए इच्छुक कई लोगों में कुछ बेहद दिलचस्प लोग मिले.

जैसे एक लड़के को इस बात में ज़्यादा रुचि थी कि मुझे सितारों वाली मूवी पसंद है. उसने मुझसे पूछा कि मैं इसे कैसे देखती हूं, क्योंकि उसे ये मूवी समझ में नहीं आई. लेकिन उसने इस बात का कोई ज़िक्र नहीं किया कि क्या वो दाढ़ी रखता है या क्या वो एक पारिवारिक आदमी है.

एक दूसरे लड़के ने मुझे अपना व्हाट्सऐप चैट दिखाया जिसमें उसने अपने डैड से बात की है. उसके पिता ने खासतौर पर ये कहा कि शादी के लिहाज से तो ये सब ठीक है, लेकिन उन्होंने ये भी पूछा क्या ये व्यावहारिक है?

अनूठा रुख

मैट्रोमोनियल के जवाब में भारत ही नहीं दुनिया के दूसरे देशों से भी लोगों ने प्रस्ताव और प्रतिक्रयाएं दीं.

मुझे सबसे ज्यादा जिन प्रतिक्रियाओं ने प्रभावित किया वो महिलाओं की थीं. व्यक्तित्व को लेकर मेरी खास सोच और रुख उन्हें बेहद साहसिक लगे. और किसी महिला का ये रुख भारत में अपने आप में अनूठा है.

शादी के लिए मैच ढूंढने वाले वेबसाइट और मैट्रोमोनियल प्रोफाइलें तो अनगिनत हैं, लेकिन इन सबके बीच वो स्पेस, वो जमीन, वो गुंजाइश की घनघोर कमी है जहां महिलाएं खुद को एक व्यक्ति, एक इंसान के रूप में रख सकें.

आखिर मैं सबको यही बताना चाहती हूं कि बस अब बहुत हो चुका, अब हम खुद को वही दिखाएंगे जो हम असल में हैं.

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