विमान में बैटरी से आग का ख़तरा...

लीथियम आयन बैटरी इमेज कॉपीरइट File Photo
Image caption लीथियम आयन बैटरी में लगी आग

अमरीका की यूनाइटेड एयरलाइंस ने थोक में लीथियम आयन बैटरी ले जाने से इनकार कर दिया है.

इसके साथ ही यह अमरीका की दूसरी बड़ी एयरलाइन बन गई है जिसने ऐसा निर्णय लिया है.

इससे पहले डेल्टा एयरलाइन्स ने फ़रवरी में थोक में लीथियम आयन बैटरी ले जाने से मना कर दिया था.

विमानन अधिकारियों का मानना है कि दो बोइंग 747 मालवाहक जहाज़ों में आग लगने में बैटरी की भी भूमिका रही.

क्या निकला परीक्षण में

फेडेरल विमानन प्रशासन ने परीक्षण में पाया कि लीथियम आयन बैटरी से बड़ी आग लगने का ख़तरा हो सकता है. परीक्षणों में एक मालवाहक कंटेनर में पांच हज़ार लीथियम आयन बैटरी और एक कैट्रिज हीटर रखा गया जिससे केवल एक बैटरी का तापमान बढ़ाया जा सके.

इस एक बैटरी ने पूरे कंटेनर में भरी बैटरीयों को ट्रिगर कर तापमान 600 सेल्सियस तक पहुंचा दिया. नतीजा था एक बड़ा धमाका जिसने कंटेनर के दरवाज़े को धकेल कर खोल दिया और भीतर सारे डिब्बों में आग लग गई.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock

कुछ महीनों बाद परीक्षण फिर दोहराया गया जिसमें एक बार फिर वही नतीजा निकला. इस बार अग्नि शमक एजेंट का इस्तेमाल किया गया था.

यूनाइटेड एयरलाइंस ने एक वक्तव्य में कहा कि "किसी भी ख़तरनाक उत्पाद का परिवहन करते समय हमारी मुख्य चिंता हमारे ग्रहकों, उनके सामन और पर्यावरण की होती है."

परीक्षण में यह भी पाया गया कि ऐसी लीथियम-मैटल बैटरी जिसे चार्ज नहीं किया जा सकता या कैमरे, कैलक्युलेटर जैसे उत्पाद जल्दी आग पकड़ सकते हैं.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में प्लेन में आग लगने की घटनाओं में बैटरी का हाथ है.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption दुबई में गिरे मालवाहक जहाज का मलवा

2010 में बोइंग 747 मालवाहक जहाज में आग लगने से वह क्रैश हो गया और दुबई के एक इलाके में गिरा जिसमें चालक दल के दोनों सदस्य मारे गए. छानबीन के दौरान फेडेरल विमानन प्रशासन ने पाया कि जहाज़ भारी मात्रा में लीथियम आयन बैटरी ले कर जा रहा था.

साल 2011 में एशियाना एयरलाइंस का जहाज़ 400 किलो लीथियम बैटरी ले जाते समय कोरिया की खाड़ी में गिर गया था जिसमें दोनों चालक दल सदस्य मारे गए थे.

इससे पहले 2006 में यूपीएस मालवाहक जहाज़ ने फिलेडेल्फ़िया के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर इमर्जेंसी लैंडिग की थी. हालांकि कारणों का पता चल नहीं पाया. लेकिन नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड की सिफारिशों में लीथियम आयन बैटरी को ले कर सलाह दी गई थी. इस घटना में विमान में सवार सभी यात्रियों को बचा लिया गया था.

एक और सिद्धांत के अनुसार मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान 370 जो पिछले साल अचानक लापता हो गई थी, उसमें पाउंड 440 लीथियम आयन बैटरी थी.

नए नियम

बैटरी की सुरक्षा को ले बढ़ती चिंता से अन्य एयरलाइंस पर और टेकनॉलोजी कंपनियों पर भी दवाब पड़ेगा कि वे इनके परिवहन के लिए नए तरीके खोजें.

लीथियम आयन बैटरी का इस्तेमाल फ़ोन, टैबलेट, लैपटॉप में होता है. साल 2013 में 4.3 अरब बैटरी का उत्पादन हुआ था. 2025 तक यह बढ़ कर 8 अरब होने की उम्मीद है.

सुरक्षा चिंताएं

अमरीकन एयरलाइंस ने फ़रवरी में कुछ तरह की लीथियम बैटली ले जाने से इनकार कर दिया था. पर अभी भी एकसाथ बंधे छोटे पैकेटों या एक बड़े पैकेट में कंपनी ऐसी बैटरियां स्वीकार कर रही है. इससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई है क्योंकि एक ही साथ अनेक बैटरियां रखी जाती हैं.

फिलहाल के लिए तीनों एयरलाइंस ऐसे पैकेट स्वीकार कर रही हैं जिनमें बैटरियां उत्पाद जैसे कि लैपटॉप के अंदर पैक हों. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार