डॉक्यूमेंट्री विवादः क्या कहती हैं बलात्कार पीड़िता?

  • 6 मार्च 2015
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निर्भया बलात्कार पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'इंडियाज़ डॉटर' से छिड़ी बहस संसद से सड़क तक हो रही है.

इस डॉक्यूमेंट्री को न दिखाए जाने के पक्ष में सबसे बड़ी दलील यह दी जा रही है कि ऐसे जघन्य अपराधियों को खुला मंच देना किस हद तक सही है.

इस शोर के बीच बीबीसी ने सामूहिक बलात्कार की शिकार बनी दो महिलाओं से यह जानना चाहा कि क्या ऐसे अपराधों के दोषियो को मंच देना उनके लिए अपमान की बात होगी.

बीबीसी इन दो औरतों की आवाज़ को हर बलात्कार की शिकार महिला की आवाज़ नहीं बता रही है. इस जंग को जीतकर निकलने वाली दो औरतों की राय उनकी ज़ुबानी.

पहली पीड़िता

मैं मेहसाना की रहने वाली हूं. अब मेरी उम्र 25 साल है और मेरी शादी हो चुकी है. मेरा एक तीन साल का बेटा भी है.

उस वक़्त मेरी उम्र 17 साल से 18 साल के बीच रही होगी, जब मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया गया.

परिवार और एक एनजीओ के सहयोग से पांच बलात्कारियों को उम्र क़ैद की सज़ा हुई.

लेकिन सच तो यह है कि एक बलात्कार पीड़िता का संघर्ष कभी ख़त्म नहीं होता. समाज में कई तरह के लोग होते हैं, इसलिए रोज़ ही कई तरह की बातों का सामना करना पड़ता है, संघर्ष करना पड़ता है.

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जहां तक डॉक्यूमेंट्री में बलात्कारी मुकेश सिंह का साक्षात्कार लेने की बात है तो उसे बिल्कुल सामने आना चाहिए. पता तो चले कि वो क्या सोचते हैं.

उनके अंदर का वहशीपन सामने तो आए. मेरी जैसी लड़कियों को इससे ताक़त ही मिलेगी.

जो लड़की मर गई, जिसके सारे अरमानों की उन्होंने हत्या कर दी, उसके बाद भी अगर उस आदमी को अफ़सोस नहीं तो यह बहुत शर्मिंदगी की बात है.

दूसरी पीड़िता

10 साल पहले मई 2005 में मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था.

जहां तक बलात्कार करने वाले मुकेश सिंह के साक्षात्कार की बात है तो ऐसी चीज़ें समाज को आईना दिखाने का काम करती हैं.

इससे उनकी भावनाओं का पता चलता है कि वह लड़कियों के बारे में क्या सोचते हैं.

ऐसे लोगों की सच्चाई बाहर आनी चाहिए. वह क्यों ऐसा करता है? उसे किसने हक़ दिया है ऐसा करने का? आप किसी के साथ ज़बरदस्ती कैसे कर सकते हैं?

अगर मुझसे बलात्कार करने वाले अपराधियों का भी साक्षात्कार हो और इससे समाज को सही संदेश मिले, ग़लत नहीं, तो मुझे वह अच्छा लगेगा.

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