अलगाववादी मसारत को रिहा करने का आदेश

  • 7 मार्च 2015
 मुफ्ती मोहम्मद सईद इमेज कॉपीरइट EPA

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अलगाववादी नेता मसारत आलम को रिहा करने के आदेश दे दिए हैं.

आलम कश्मीर घाटी में हिंसक प्रदर्शन के दौरान पथराव करने के आरोप में करीब पांच साल से जेल में बंद थे.

आलम की रिहाई भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर सरकार के उस आदेश के बाद की गई है जिसमें कहा गया था कि उन अलगाववादियों को रिहा कर दिया जाए, जिनके ख़िलाफ़ कोई गंभीर मामला दर्ज नहीं है.

कोर्ट में आरोप ख़ारिज!

हालाँकि मसारत के वकील शबीर बट का कहना है कि उनकी रिहाई 'लंबित' थी, क्योंकि अदालत ने पहले ही पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया था.

शबीर कहा, "वे ग़ैर-क़ानूनी तरीके से हिरासत में थे. उन्हें बहुत पहले ही रिहा कर देना चाहिए था क्योंकि उनके ऊपर लगाए गए आरोपों को अदालत ने निराधार पाया था. चुनाव की वजह से सरकार ने उनकी रिहाई में देरी की."

मसारत की रिहाई को पीडीपी-भाजपा गठबंधन के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है.

जम्मू-कश्मीर में भाजपा के प्रवक्ता अशोक कौल ने कहा,"मुफ्ती अकेले कोई फ़ैसला नहीं ले सकते हैं. हमें इसमें शामिल नहीं किया गया. मुख्यमंत्री को कम से कम राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर हमसे सलाह लेनी चाहिए थी."

44 वर्षीय मसारत एक चरमपंथी नेता रह चुके हैं जिन्होंने 1990 के दशक में अलगाववादी आंदोलन का दामन थामा था और मुस्लिम लीग का गठन किया था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार