हमें देशभक्ति ना सिखाएं: नरेंद्र मोदी

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जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई पर पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह और फिर बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान दिया.

लेकिन विपक्ष उनके बयान से संतुष्ट नहीं हुआ. दोनों ही नेताओं ने कहा कि उनके स्वर भी सदन के सदस्यों के आक्रोश के साथ हैं.

मोदी का जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के हंगामे के बीच लोक सभा में कहा, "विपक्ष सत्तारूढ़ दल को देशभक्ति ना सिखााए."

हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि कश्मीर की सरकार में उनकी पार्टी भी है इसलिए भाजपा की आलोचना करने का विपक्ष को पूरा हक़ है.

मोदी बोले, "इस मामले पर पैदा हुए आक्रोश में मैं भी मेरा स्वर मिलाता हूँ."

प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि जम्मू कश्मीर में जो कुछ हो रहा है वो बिना केंद्र सरकार के मशविरे से हो रहा है.

मोदी ने कहा, "आक्रोश दल का नहीं, यह आक्रोश उस तरफ की बेंचों या इस तरफ की बेंचों का भी नहीं बल्कि पूरे देश का है. हम एक स्वर से अलगाववाद को समर्थन करने वालों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हैं."

'स्पष्टीकरण मांगा'

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इससे पहले गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने लोक सभा को बताया कि उन्होंने जम्मू कश्मीर के गृह विभाग से मसर्रत आलम बट की रिहाई के बारे में स्पष्टीकरण माँगा है.

राजनाथ सिंह का कहना था कि बट के खिलाफ 1995 से कुल 27 मामले दर्ज हैं जिनमें देश द्रोह के भी मामले हैं. उन्होंने बताया कि फिलहाल सभी मामलों में उन्हें ज़मानत मिल चुकी है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने जम्मू कश्मीर के गृह विभाग से कुछ स्पष्टीकरण मांगे हैं जिनके मिलते ही वो इस मुद्दे पर सदन में दोबारा बयान देंगे.

सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर भाजपा की सहमति के बिना जम्मू-कश्मीर सरकार ऐसे क़दम उठा रही है तो भाजपा पीडीपी सरकार से अलग क्यों नहीं हो जाती.

दोनों नेताओं के बयान से पहले संसद के दोनों सदनों में विपक्षी दलों ने सरकार से सवाल पूछे और भारतीय जनता पार्टी पर सत्ता के लिए कट्टरपंथियों से समझौते का आरोप लगाया.

राज्यसभा में भी हंगामा

राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस राष्ट्रविरोधी रिहाई का जवाब देना चाहिए.

तो मायावती ने कहा कि सत्ता के लालच के लिए भाजपा को चरमपंथियों से समझौता नहीं करना चाहिए.

राज्यसभा में सदन के नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उनकी पार्टी और सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगी.

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उन्होंने कहा, "जहाँ तक एक व्यक्ति की रिहाई का सवाह है, उसे लेकर जो चिंताएँ जताई जा रही है, उससे मैं वाकिफ हूँ. गृह मंत्रालय ने इस पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है."

जम्मू-कश्मीर में हाल ही में लंबे गतिरोध के बाद पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार बनी है.

लेकिन सरकार बनने के कुछ दिनों बाद ही पहले तो मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद के बयान पर हंगामा हुआ और फिर मसर्रत आलम की रिहाई को लेकर गठबंधन के दोनों दलों में मतभेद खुल कर सामने आ गए हैं.

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