विश्वासमत प्रस्ताव पर बहस, नहीं आएँगे मांझी

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बिहार में नीतीश कुमार सरकार द्वारा सदन में पेश विश्वास मत पर बहस चल रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री मांझी के सरकारी आवास के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मांझी ने विधानसभा के सचिव के पत्र लिखकर अपनी बीमारी की जानकारी दी है और वे बजट सत्र में शामिल नहीं होंगे.

पहले दिन राज्य की 18 दिन पुरानी नीतीश कुमार सरकार सदन का विश्वास हासिल करने की कोशिश कर रही है.

मांझी कैबिनेट में मंत्री रहे महाचंद्र प्रसाद सिंह के अनुसार मांझी समर्थक विधायकों ने विश्वास मत के पक्ष में मतदान करने का फैसला लिया है.

नीतीश कुमार ने 22 फ़रवरी को राज्य के मुख्यमंत्री पद की ज़िम्मेवारी चौथी बार संभाली थी. बजट के साथ सत्र में आधा दर्जन से अधिक विधेयक भी पेश किए जाने हैं.

व्हिप जारी

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विश्वासमत की तैयारी को लेकर जदयू ने मंगलवार को नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर विधायक दल की बैठक भी बुलाई थी.

पार्टी की रणनीति के संबंध में बिहार सरकार के मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने विश्वास मत से पहले कहा, "पार्टी ने अपने विधायकों को विश्वासमत के समर्थन में मतदान करने के लिए व्हिप जारी कर दिया है."

श्याम रजक के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी सहित पार्टी के उन विधायकों को भी व्हिप भेजा गया है, जिन्होंने पिछले दिनों नीतीश कुमार के विधायक दल का नेता चुने जाने का विरोध किया था.

जारी रहेगी लड़ाई

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मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने भी मंगलवार को अपने विधायकों से रायशुुमारी कर अपनी रणनीति को अंतिम रूप दिया.

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भाजपा के नंदकिशोर यादव ने सवाला उठाया कि 22 महीने के अंदर चार बार विधानसभा में विश्वास मत क्यों पेश किया जा रहा है.

यादव ने कहा, "भाजपा इस सवाल को सदन में प्रमुखता से उठाते हुए सरकार के विफलताओं को सामने लाएगी."

सूत्रों के अनुसार भाजपा, जदयू और नीतीश कुमार को असहज करने के लिए अपने लिए आवंटित समय का हिस्सा जीतनराम मांझी को बहस के दौरान अपनी बात रखने के लिए दे सकती है.

हंगामेदार चर्चा

प्रभात खबर के काॅरपोरेट संपादक राजेंद्र तिवारी का मानना है कि विश्वासमत औपचारिकता मात्र है.

तिवारी कहते हैं, "विश्वास मत जीतनराम मांझी के लिए इन मायनों में महत्त्वपूर्ण रहेगा कि वे पार्टी व्हिप के मद्देनज़र इस पर क्या रुख अख्तियार करते हैं."

उनका मानना है कि पिछले दिनों की राजनीतिक उठापटक का ज़्यादा असर इस सत्र के दौरान देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि नीतीश कुमार आसानी से बहुमत हासिल करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

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