शाह के निशाने पर क्यों आईं पांच देवियां?

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भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने के आठ महीने बाद अमित शाह ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर ही दिया. भाजपा कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या सौ का आंकड़ा पार कर गई है जो पार्टी के इतिहास में सबसे बड़ी कार्यकारिणी है.

सदस्यों की संख्या बढ़ाने के बावजूद अमित शाह पांच महिला सदस्यों के लिए इसमें जगह नहीं बना सके. इन्हें क्यों हटाया गया, इसके बारे में पार्टी में कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है.

एक बात तो ज़ाहिर है कि अमित शाह उनसे खुश नहीं थे. पर क्यों? इसका जवाब भाजपा में भी बहुत से लोग खोज रहे हैं. पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्रियों की सूची में येदियुरप्पा एक मात्र दुर्भाग्यशाली रहे.

साध्वी और योगी

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Image caption नजमा हेपतुल्लाह के राजभवन भेजे जाने की बातें हैं.

कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या 75 से बढ़कर 111 हो गई है. लेकिन नजमा हेपतुल्ला, स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, शाइना एनसी और सुप्रीम कोर्ट की वकील पिंकी आनंद को कार्यकारिणी तो छोड़िए 40 विशेष आमंत्रितों की सूची में भी जगह नहीं मिली.

नजमा हेपतुल्ला को हटाया जाना तो फिर भी समझ में आता है. क्योंकि चर्चा है कि बजट सत्र के बाद उनकी केंद्रीय मंत्रिमंडल से भी छुट्टी होने वाली है. उन्हें राजभवन भेजे जाने की उम्मीद है.

हटाए जाने वालों में सबसे चौंकने वाला नाम स्मृति ईरानी का है. ईरानी और अमित शाह के संबंध मधुर नहीं है, यह पार्टी में किसी से छिपा नहीं है.

लेकिन एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सीधे कैबिनेट मंत्री बना दिया और अब उन्हें नीति आयोग का भी सदस्य बना दिया गया है. ऐसे में अमित शाह का उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर का रास्ता दिखाना चौंकाने वाला ज़रूर है.

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ज़ाहिर है कि अमित शाह ने यह फैसला प्रधानमंत्री की मंज़ूरी के बिना नहीं किया होगा. इसी तरह शाइना एनसी को क्यों हटाया गया, यह किसी की समझ में नहीं आ रहा है.

बात यहीं तक नहीं है. इन पांच देवियों की रुख़सती के बाद अमित शाह की नई कार्यकारिणी में साध्वी निरंजन ज्योति विशेष आमंत्रित के तौर पर हैं.

यह वही साध्वी हैं जिनके एक बयान के कारण संसद में हंगामा हुआ. प्रधानमंत्री को संसद के दोनों सदनों में सफाई देनी पड़ी.

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से लोकसभा सदस्य योगी आदित्यनाथ पहली बार राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आए हैं. उनके बारे में अमित शाह की राय बहुत अच्छी है.

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उत्तर प्रदेश में अमित शाह की भविष्य की योजना में योगी आदित्यनाथ की विशेष भूमिका रहने वाली है. उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनावों में योगी आदित्यनाथ की भूमिका से हुए नुकसान के बावजूद शाह की राय उनके बारे में बदली नहीं है.

दो मां-बेटे भी

नई कार्यकारिणी में पार्टी के लगभग सारे प्रमुख नेता हैं. लोकसभा चुनाव के पहले और बाद में आए राव इंद्रजीत सिंह, चौधरी वीरेन्द्र सिंह और सुरेश प्रभु भी कार्यकारिणी में बैठेंगे.

मां-बेटे भी भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में नजर आएंगे. मेनका गांधी और उनके पुत्र वरुण गांधी को जगह मिल गई है.

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यह इस बात का संकेत है कि वरुण गांधी से अमित शाह की नाराज़गी कुछ कम हुई है. महामंत्री पद से वरुण की छुट्टी के बाद उम्मीद थी कि कार्यकारिणी में भी उन्हें जगह नहीं मिलेगी.

इसी तरह राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के पुत्र दुष्यंत सिंह पर भी शाह की 'कृपा' हुई है.

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तैयारी में प्रदेश के पुराने नेता कोई विघ्न न डालें, शायद इसी खयाल से नए लोगों के साथ पुराने लोगों को भी बनाए रखा गया है.

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इसकी वजह से लाल जी टंडन, रमापतिराम त्रिपाठी, कलराज मिश्र, विनय कटियार और संतोष गंगवार जैसे लोग बचे रहे तो महेश शर्मा और राजवीर सिंह (कल्याण सिंह के बेटे) को भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बैठने का मौका मिल गया है.

अंग्रेज़ी दैनिक के सम्पादक और राज्यसभा सदस्य चंदन मित्रा के बारे में लगता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें माफ कर दिया है. मोदी जब नेतृत्व की लड़ाई लड़ रहे थे, चंदन मित्रा उनके विरोधी खेमे में थे.

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