तमिलों, मछुआरों की समस्या का होगा हल ?

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तीन देशों की यात्रा पर निकले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका पहुँच चुके हैं. प्रधानमंत्री मोदी का श्रीलंका दौरा हालिया घटनाक्रम की वजह से और महत्वपूर्ण हो गया है.

राष्ट्रपति मैथ्रिपाला सिरिसेना ने कुछ ही दिन पहले एक बयान में कहा था कि श्रीलंका की सीमा में दाखिल होने वाले भारत के मछुआरों को गोली मार देंगे.

श्रीलंका और चीन की दोस्ती भी भारत के लिए चिंता का विषय है. ऐसे में यह सवाल उठता है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए श्रीलंका में चुनौतियां क्या-क्या हैं?

तमिल हित

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पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री 28 साल बाद श्रीलंका का दौरा कर रहा है.

श्रीलंका में तमिल आबादी का पुनर्वास दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा रहा है.

पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने संविधान संशोधन करके अपने हाथ में सारी ताकत ले ली थी और बार-बार वायदे करते रहे लेकिन तमिल आबादी के लिए किया कुछ नहीं किया.

वहीं भारत के राजनीतिक नेतृत्व ने भी बीते 15-20 साल में श्रीलंका के तमिलों की ओर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया.

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Image caption भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कोलंबो में अपने श्रीलंकाई प्रतिपक्षी मंगल समरवीरा के साथ.

अपने नज़दीकी पड़ोसी देशों से साथ संबंध सुधारने की नीति और उस पर अमल से इन छोटे देशों का भारत के प्रति नज़रिया भी बदला है.अब वह भारत की शिकायत नहीं कर रहे हैं.

सिरिसेना ने राष्ट्रपति बनने के बाद पहला विदेशी दौरा भारत का ही किया था. श्रीलंका में नई सरकार बनने के बाद से विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी दो बार श्रीलंका जा चुकी हैं.

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी का दौरा बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है. मोदी शायद श्रीलंका की संसद को भी संबोधित करेंगे.

मछुआरों की समस्या

Image caption श्रीलंका ने भारतीय तमिल मछुआरों को गिरफ़्तारी के बाद रिहा किया था.

भारत और श्रीलंका के बीच मछुआरों की समस्या कई वर्षों से लगातार बनी हुई है. इसमें व्यावहारिक दिक्कत यह है कि आप समुद्र में कोई रेखा खींच नहीं सकते, इसलिए मछुआरे अक्सर सीमा पार कर जाते हैं.

प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि दोनों देशों के मछुआरे और उनके संगठन आपस में बैठकर बात करें और समाधान निकालें.

राष्ट्रपति सिरिसेना ने तमिलों की समस्याओं को देखने, उनके समाधान के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है और इस दिशा में कुछ कदम भी उठाए हैं. अब देखना यह है कि वह इसे किस तरह आगे बढ़ाते हैं.

भारत ने श्रीलंका में तमिलों के पुनर्वास के लिए बड़ी संख्या में मकान बनाए थे लेकिन पूर्व राष्ट्रपति राजपक्षे ने उसमें भी अड़चनें डाली थीं.

अब अगर सिरिसेना राज़ी होते हैं तो संभवतः भारत एक बार फिर तमिलों के पुनर्वास में मदद करना चाहेगा.

(बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन से बातचीत पर आधारित)

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