बेमौसम बरसात ने बढ़ाई किसानों की मुश्किल

  • 16 मार्च 2015
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पिछले कुछ दिनों में उत्तर भारत में हुई तेज़ बारिश के कारण कई राज्यों में फसल को भारी नुक़सान हुआ है.

बेमौसम तेज़ बारिश, बिजली कड़कने और ओले पड़ने के कारण राजस्थान में 25 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं उत्तराखंड में दो लोग भूस्खलन की चपेट में आ गए.

'भारत सरकार कर रही है नज़रअंदाज़'

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कृषि मामलों के विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार स्थिति की गंभीरता को नज़रअंदाज़ कर रही है.

उनका कहना था,"ये नुक़सान ऐसे समय पर हो रहा है जब अगले 15 दिनों में ही खेतों में कटाई शुरू होने वाली थी. किसानों के लिए ये बहुत बड़ा झटका है. सरकार ने खुद पिछले हफ़्ते ये माना था कि इस बारिश से 50 लाख हेक्टेयर पर नुकसान हुआ है. इस हफ़्ते मेरे ख़्याल में उसमें 50 लाख हेक्टेयर और जुड़ गया है."

उन्होंने कहा, "अगर इतने बड़े पैमाने पर उद्योग क्षेत्र में नुक़सान हुआ होता तो सरकार एक आर्थिक पैकेज की घोषणा कर चुकी होती, लेकिन किसानों पर पड़ी मार पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है."

उन्होंने सरकार की फसल बीमा योजना की आलोचना करते हुए कहा कि ये योजना पिछले 25 सालों से पायलट स्टेज पर ही बनी हुई है और इसमें बताई गई शर्तों की वजह से फ़ायदा किसानों के बजाय इंश्योरेंस कंपनियों को जा रहा है.

राजस्थान

स्थानीय पत्रकार आभा शर्मा के अनुसार राजस्थान में गत तीन दिनों से हो रही बारिश और ओला पड़ने से राज्य के 33 में से 26 ज़िलों के चार हज़ार से ज़्यादा गांव प्रभावित हुए हैं.

राज्य के मुख्य सचिव सीएस राजन के अनुसार बिजली गिरने और वर्षा के कारण 25 लोगों की मौत हो गई है और एक हज़ार से ज़्यादा पशुओं की जान जा चुकी है.

शुरुआती सूचना के अनुसार जीरा, इसबगोल, गेंहू, चना, सरसों, जौ आदि की फसलें प्रभावित हुई हैं. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए सभी जिला कलक्टरों से नुक़सान का जायजा लिया है और प्रभावित किसानों को जल्द ही राहत पहुंचाने की बात कही है.

रविवार को बारिश का क़हर ज़्यादा देखा गया और फ़सलों के साथ-साथ मवेशियों को भी बारिश की मार झेलनी पड़ी है.

महाराष्ट्र

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महाराष्ट्र के स्थानीय पत्रकार देवीदास देशपांडे ने बताया कि राज्य के विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और पश्चिम महाराष्ट्र के इलाकों में फसल पर बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है.

मौसम विभाग के अनुसार राज्य में आने वाले तीन दिनों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. साल 2013 की तरह ही 2015 में सूखे और बेमौसम बारिश की वजह से महाराष्ट्र में अंगूर, संतरा, गेहूं, चना, मिर्च, सूरजमुखी, अनार जैसी फसलों को भारी नुक़सान हुआ है.

नासिक ज़िले में प्रशासन के आकलन के अनुसार 321 गांवों में 30 हज़ार हेक्टेयर क्षेत्र इस बारिश से प्रभावित हुआ है.

राज्य के राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने पिछले सप्ताह कहा था कि चूंकि अभी बारिश और ओलों का कहर जारी है, इसलिए ये सिलसिला समाप्त होने के बाद ही उसके नुक़सान का आकलन किया जाएगा.

उत्तर प्रदेश

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बीते दिनों हुई मूसलाधार बारिश ने उत्तर प्रदेश के किसानों को भी चिंतित और मायूस कर दिया है. अनुमान है कि इन दो दिनों में हुई 7.4 मिलीमीटर वर्षा ने दाल, गेहूं, सरसों और लाही की फसलों को ज़बरदस्त नुक़सान पहुंचाया है.

स्थानीय पत्रकार अतुल चंद्रा के अनुसार लखनऊ, कानपुर, मथुरा आगरा, बनारस, आजमगढ़ सहित कई अन्य ज़िलों में बारिश से फसलों को 40 से 60 प्रतिशत नुक़सान होने का अनुमान है.

प्रदेश के प्रमुख सचिव राजस्व सुरेश चन्द्र के अनुसार सभी ज़िलाधिकारियों से बारिश से हुए नुक़सान की रिपोर्ट माँगी गई है. सोमवार को स्थिति की समीक्षा की जाएगी.

वहीं यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किसानों को राहत देने के लिए 200 करोड़ रुपए की सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की है. उन्होंने साथ ही पाँच लाख रुपए की बीमा राशि की भी घोषणा की है.

मध्यप्रदेश

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वहीं मध्यप्रदेश में बारिश और ओलों की वजह से 14 जिलों के लगभग 450 गांव की फसल चौपट हो गई है.

बिजली गिरने से ग्वालियर संभाग में सात लोगों की मौत हो गई है. स्थिति से दबाव में आए एक किसान ने आत्महत्या कर ली है जबकि एक किसान की मौत दिल का दौरा पड़ने से हो गई है.

स्थानीय पत्रकार शुरैह नियाज़ी के अनुसार ग्वालियर में इस महीने बरसात ने पिछले कई सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है. यहां पिछले 24 घंटे में 58 मिलीमीटर बरसात हुई है.

सबसे ज्यादा नुकसान भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, ग्वालियर, जबलपुर और सतना संभागों में हुआ है.

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इन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नुकसान गेंहू और चने की फसलों को हुआ है. वहीं नीमच और मंदसौर में हुई ओलावृष्टि से इसबगोल और धनिये की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वंय प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने का फैसला किया है. वही उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे फौरन शुरू करने के निर्देश भी दिया है ताकि किसानों को राहत पहुचाई जा सकें.

अकेले ग्वालियर संभाग में ही लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर खड़ी फसल प्रभावित हुई है. भोपाल संभाग के कई गावों में फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं.

राज्य सरकार ने 18 मार्च से शुरू होने वाली सरकारी गेंहू की ख़रीद को एक सप्ताह के लिये आगे बढ़ा दिया है.

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