सुशासन वाले राज्य में कदाचार का कीर्तिमान

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Image caption स्थानीय पत्रकार और फोटोग्रफर दीपांकर बताते हैं कि परीक्षा केंद्रों पर अभिभावकों की भीड़ तब जुट रही है जबकि तमाम केंद्रों पर धारा 144 लागू रहती है.

बिहार में मंगलवार को 10वीं की परीक्षा शुरू हुई. कई जिलों से बड़े पैमाने पर खुलेआम नकल की खबरें आने के कारण यह परीक्षा चर्चा में है.

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Image caption फोटोग्राफर दीपांकर के मुताबिक वे परीक्षा केंद्र अधीक्षकों की अनुमति से कमरों के अंदर गए. वहां स्टुडेंट्स को कैमरे की उपस्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ा और वे अपने अंदाज में परीक्षा देने में मशगूल रहे.

स्थानीय अखबारों के पहले पन्ने पर जान हथेली पर लेकर नकल में मदद करते अभिभावकों की तस्वीरें छपी हैं.

प्रादेशिक समाचार चैनलों में नकल करवाने की छूट देने के बदले परीक्षा केंद्रों पर तैनात पुलिस को घूस लेते हुए दिखाया गया है.

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Image caption कैमूर के फोटो पत्रकार मंटू पांडेय ने बताया कि उनके शहर में नकल के बहुत कम मामले सामने आए हैं. उन्हें नकल करते छात्र की ये तस्वीर कई परीक्षा केंद्रों पर घूमने के बाद मिली.

परीक्षा का आयोजन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति(बीएसईबी) कराती है.

परीक्षा में सरकारी और सरकारी मान्यता प्राप्त स्कूलों के 14 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं. परीक्षा 24 मार्च तक चलेगी.

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Image caption सहरसा के एक परीक्षा केंद्र अनुग्रह नारायण सिंह उच्च विद्यालय से कल जांच के दोरान नौ बोरी पुर्जे बरामद हुए.

बीएसईबी के अनुसार राज्य भर में पहले दो दिनों में 400 से अधिक परीक्षार्थियों को निष्कासित किया गया. जबकि पहले दिन अंग्रेजी की परीक्षा हुई जिसके अंक नतीजे में नहीं जुड़ते.

अंग्रेजी विषय में केवल में परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य है. इसके बावजूद इस विषय में भी परीक्षार्थी नकल करने से बाज नहीं आए और पहले ही दिन 300 से अधिक परीक्षार्थी निष्कासित हुए.

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Image caption दीपांकर बताते हैं कि नकल बेखौफ तरीके से इसलिए भी जारी है क्योंकि स्थानीय मीडिया में खबरें आने के बावजूद जिला प्रशासन नकल रोकने की कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाया है.

बीएसईबी का कहना है कि उसने नकल रोकने के लिए कड़े निर्देश दे रखे हैं. परीक्षा केंद्र की वीडियोग्राफी की व्यवस्था से लेकर छापामार जांच के लिए उड़न दस्ते भी घूमते हैं.

इस सबके बीच बड़े पैमाने पर हो रही नकल के लिए बीएसईबी के अध्यक्ष प्रोफेसर लालकेश्वर प्रसाद सिंह जिला प्रशासन को जिम्मेदार मानते हैं.

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Image caption नकल के सबसे अधिक मामले सारण जिले में सामने आए. शहर में कुछ केंद्रों पर पुलिस ने बाहर खड़ी भीड़ को खदेड़ा भी.

वहीं शिक्षाविद प्रोफेसर विनय कंठ का मानना है कि बड़े पैमाने पर हो रही नकल की कई वजहें हैं.

विनय कंठ हाईस्कूल स्तर पर पढ़ाई के स्तर में गिरावट, नामांकन से लेकर नौकरी पाने तक में अंक का महत्व बने रहने और सामाजिक रूप से नकल को बुरा नहीं मानने को इसकी बड़ी वजह मानते हैं.

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