ममता के शासन में 'रेप कांड' बने सुर्खियां

  • 21 मार्च 2015
पश्चिम बंगाल, नन रेप मामले के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन इमेज कॉपीरइट AP

पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले में एक नन के साथ गैंगरेप की घटना की जांच सीबीआई को सौंप कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार ने भले ही राहत की सांस ली हो, ऐसी घटनाओं में इंसाफ के मामले में राज्य का रिकॉर्ड बहुत अच्छा नहीं रहा है.

चार साल पहले ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद राज्य में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के कई ऐसे मामले हुए जो सुर्खियों में बने रहे. लेकिन उनमें हुई जांच किसी निश्चित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है. कई घटनाओं के मुख्य अभियुक्त अब तक फ़रार हैं.

लेकिन ममता बनर्जी और उनके मंत्री राष्ट्रीय क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों को ग़लत ठहराते हुए विपक्षी राजनीतिक दलों और मीडिया के एक वर्ग को राज्य की छवि ख़राब करने का ज़िम्मेदार ठहराते रहे हैं.

ममता बनर्जी के सत्ता में आने के बाद से हुए कुछ चर्चित रेप घटनाओं पर एक नज़र.

पार्क स्ट्रीट सामूहिक बलात्कार कांड

5 फरवरी 2012 को कोलकाता के व्यस्त पार्क स्ट्रीट इलाके में हुई गैंगरेप की घटना ने पूरे देश में हलचल मचा दी. एक पब से बाहर निकलने के बाद एक महिला के साथ चलती कार में सामूहिक बलात्कार किया गया. सुज़ैट जॉर्डन नाम की इस महिला की पिछले सप्ताह ही मौत हुई.

उस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए ये मनगढ़ंत घटना बनाई गई है.

तब राज्य सरकार ने इस मामले की तफ्तीश कर बलात्कार की पुष्टि करने वाली महिला पुलिस अधिकारी दमयंती सेन का तबादला कर दिया था.

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अब तक इस मामले में पुलिस तीन अभियुक्तों को तो गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन मुख्य अभियुक्त क़ादिर ख़ान और अली ख़ान अब तक फ़रार हैं. मामले की सुनवाई लगभग पूरी हो चुकी है. लेकिन अब तक हाईकोर्ट ने इस पर फैसला नहीं सुनाया है.

कटवा सामूहिक बलात्कार

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25 फरवरी 2012 को बर्दवान ज़िले के कटवा में एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना हुई. इस मामले में नौ में से एक अभियुक्त को अब तक पकड़ा नहीं जा सका है.

इस मामले में एक विधवा महिला को ट्रेन से जबरन उतारकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था. पुलिस और प्रशासन ने तो पहले ऐसी किसी घटना से इनकार करते हुए रिपोर्ट दर्ज करने से ही मना कर दिया था.

रेलवे ने भी मामले की लीपापोती का प्रयास किया था, लेकिन अखबारों और टीवी चैनलों पर पीड़िता का बयान आने के बाद पुलिस सक्रिय हुई थी.

इस मामले में अब तक गवाहों के बयान तक नहीं लिए गए हैं.

कामदुनी सामूहिक बलात्कार कांड

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सात जून 2013 को कामदुनी में एक स्कूली छात्रा को अगवा कर उसके साथ कई दिनों तक बलात्कार किया गया था. इस मामले में नौ लोगों की गिरफ़्तारी हुई. यह मामला हाईकोर्ट में है.

पहले तो पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज नहीं की थी. लेकिन जब अखबारों और टीवी चैनलों पर यह मामला प्रमुखता से उठा तब प्रशासन की नींद टूटी.

उसके बाद ही प्राथमिकी दर्ज की गई और अभियुक्तों की धर-पकड़ का अभियान शुरू हुआ. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पीड़िता के घर का दौरा किया.

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मध्यमग्राम सामूहिक बलात्कार कांड

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13 दिसंबर 2013 को मध्यमग्राम में एक स्कूली छात्रा के साथ दो बार सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई. बाद में लड़की की जलने के कारण मौत हो गई लेकिन उसकी हत्या हुई है या उसने आत्महत्या की है ये अभी तक साफ़ नहीं हुआ. इस मामले के छह में से एक अभियुक्त सरकारी गवाह बन गया था.

मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार घटना में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता के शामिल होने के कारण पुलिस ने पहले मामले में सक्रियता नहीं दिखाई.

ममता ने परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने का भी वादा किया था. लेकिन लड़की का परिवार वापस अपने मूल प्रदेश बिहार चला गया.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए अपने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को पीड़िता के घरवालों से मिलने के लिए कोलकाता भेजा था. उन्होंने भी पीड़िता के घर के एक सदस्य को सरकारी नौकरी समेत हरसंभव सहायता का भरोसा दिया था.

इस मामले की वजह से बिहार और बंगाल सरकारों के बीच तनातनी भी हुई थी. इसके चलते यह मामला लंबे अरसे तक सुर्खियों में रहा था.

एक स्थानीय अदालत ने बाकी पांच अभियुक्तों को दोषी क़रार देते हुए सितंबर 2014 में प्रत्येक को 20 साल की सजा सुनाई. सज़ा पाने वालों ने हाईकोर्ट में अपील की है, जहां इसकी सुनवाई चल रही है.

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नेता की पत्नी के साथ बलात्कार

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17 अगस्त 2014 को पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में एक सीपीएम नेता की पत्नी के साथ सामूहिक बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी.

इस मामले में अब तक किसी भी अभियुक्त को गिरफ़्तार नहीं किया जा सका है, जबकि पुलिस में दर्ज शिकायत में 12 लोगों को नामजद किया गया था.

इस मामले में भी पुलिस ने बिना मेडिकल जांच के पहले ही कह दिया था कि महिला के साथ बलात्कार नहीं हुआ है और उसकी हत्या शायद आपसी रंजिश के चलते हुई है.

छात्रा के साथ बलात्कार के बाद हत्या

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दो सितंबर 2014 को जलपाईगुड़ी ज़िले के धूपगुड़ी में दसवीं कक्षा की एक छात्रा के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी.

इस मामले के 13 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है. यह मामला भी हाईकोर्ट में है. इस मामले में भी पुलिस ने पहले एफआईआर नहीं दर्ज की.

कथित तौर पर इस मामले के अभियुक्तों को स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेताओं का संरक्षण हासिल था.

मीडिया में लगातार ख़बरें छपने के बाद ही पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की और अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया.

महिलाओं के साथ अपराध

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एक महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद राज्य में महिलाओं से जुड़े अपराध थम नहीं रहे हैं.

एनसीआरबी ने दो साल पहले अपनी रिपोर्ट में कहा था कि महिलाओं के प्रति अपराध के मामले में पश्चिम बंगाल पहले नंबर पर है.

एनसीआरबी के मुताबिक वर्ष 2013 के दौरान राज्य में बलात्कार के 1685 मामले दर्ज हुए हैं.

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