महाराष्ट्रः जाति पंचायत हुई समाप्त

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महाराष्ट्र की घुमंतू जातियों में से एक, वैदू समाज ने अपनी जाति पंचायत समाप्त करने की घोषणा की है.

अहमदनगर ज़िले के श्रीरामपुर में अखिल भारतीय वैदू जाति पंचायत के मुखिया चंदरबापू दासरयोगी ने वैदू समाज की जाति पंचायत रद्द करने की घोषणा की.

इस बैठक में महाराष्ट्र के वैदू समाज जाति पंचायत के अध्यक्ष शामलिंग शिंदे और अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे.

इस अवसर पर शामलिंग शिंदे ने कहा, "जाति पंचायत वैदू समुदाय में पीढ़ियों से चली आ रही है. इस निर्णय से इसे पूरी तरह से समाप्त किया गया है. यह निर्णय महाराष्ट्र के कोने-कोने में लागू होगा."

जागरूकता के कारण हुआ संभव

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इस अवसर पर जाति पंचायत के विरोध में अभियान चलाने वाली अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के जिलाध्यक्ष रंजना गवांदे और कृष्णा चांदगुडे भी उपस्थित थे.

रंजना गवांदे ने बताया, "हमारा अभियान पिछले तीन-चार साल से चल रहा था. कलेक्टर, कोर्ट तथा सरकार के स्तर पर हमने यह मामला उठाया था. कानूनी कार्रवाई के भय और लोगों की जागरूकता के कारण यह संभव हुआ."

इस पंचायत ने पिछले कई वर्षों से कड़े निर्णय दिए थे. इस कारण समाज में काफी आक्रोश बढ़ा था.

एक तीन साल की बच्ची का 40 साल के आदमी से विवाह करवाना, बिरादरी के बाहर शादी करने पर परिवार को बहिष्कृत करना, फैसले न माननेवालों पर बड़ा जुर्माना लगाना जैसे कई फैसले पंचायत ने किए थे.

अन्य जगहों पर भी असर

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Image caption महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस.

अहमदनगर ज़िले के मढी गांव में हर वर्ष होली के पांच दिन बाद से सभी घुमंतू जातियों की पंचायतें होती हैं, जहां इस तरह के फ़ैसले किए जाते हैं.

लेकिन इस वर्ष कोई भी पंचायत नहीं हुई. इसलिए माना जा रहा है कि अन्य समुदायों की जाति पंचायतें भी समाप्त हो जाएंगी.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि जाति पंचायतों द्वारा किसी को बहिष्कृत करने के ख़िलाफ़ एक नया क़ानून बनाया जाएगा.

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