अगर मैं होता कप्तान ...

  • 26 मार्च 2015
भारत, ऑस्ट्रेलिया, क्रिकेट विश्व कप

विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट में गुरुवार को दूसरा सेमीफाइनल खेला जाएगा.

इस हाई वोल्टेज मुक़ाबले में अपने ख़िताब की रक्षा में जुटी भारतीय क्रिकेट टीम सिडनी में मेज़बान ऑस्ट्रेलिया का सामना करेगी.

अब इस अहम मुक़ाबले में दबाव किस पर होगा, टीम में बदलाव हो या नहीं, कैसी रणनीति हो, टॉस जीतकर क्या करें, कितने रनों का लक्ष्य विपक्षी को दें.

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वैसे तो ये सब सवाल कप्तान के दिमाग़ में चलते हैं लेकिन अगर इस मुक़ाबले में कुछ पुराने धुरंधरो से पूछा जाए कि अगर वे कप्तान होते तो उनकी रणनीति क्या होती.

इसे लेकर साल 1983 में विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम के अहम ऑलराउंडर और पूर्व कोच रहे मदन लाल कहते हैं, "अगर मैं कप्तान होता तो कहता कि आप जैसा खेल रहे हैं, वैसा ही खेलिए. सेमीफाइनल बड़ा मैच है इसलिए इसके लिए अलग से कोशिश करनी चाहिए."

उन्होंने बीबीसी हिंदी से ख़ास बातचीत में कहा, "टीम को अच्छी शुरूआत मिलनी चाहिए क्योंकि अगर शुरुआत में दो-तीन विकेट जल्दी गिर जाएं तो टीम दबाव में आ जाती है.

शानदार गेंदबाज़ी

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मदन लाल के मुताबिक, "वैसे तो पूरे विश्व कप में भारत के गेंदबाज़ोंं ने शानदार गेंदबाज़ी की है लेकिन अगर बीच में एक-दो ओवर महंगे जाएं तो चिंता नहीं करनी चाहिए."

दूसरी तरफ साल 1987 में विश्व कप क्रिकेट टूर्नामेंट का सेमीफाइनल खेल चुके भारत के पूर्व स्पिनर मनिंदर सिंह कहते हैं कि अगर मैं कप्तान होता तो मैं भी कुछ अलग से नहीं करता."

उन्होंने कहा, "भारतीय टीम का सबसे कमज़ोर पक्ष गेंदबाज़ी माना जा रहा था लेकिन वही सबसे मज़बूत पक्ष साबित हुआ. भारत की पिछली सात जीतों में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और किसी भी टीम को टिकने नहीं दिया."

लाइन-लेंग्थ

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मनिंदर सिंह बताते हैं, "उन्होंने अभी तक 70 विकेट लिए हैं. अब भी भारतीय गेंदबाज़ोंं को अपनी लाइन और लेंग्थ वही रखनी चाहिए जैसी उन्होंने रखी है."

उनके मुताबिक, "स्पिनर आर अश्विन भी शानदार गेंदबाज़ी कर रहे हैं और लगातार विकेट लेने की कोशिश कर रहे हैं इससे दूसरे गेंदबाज़ों को भी मदद मिलती है."

मनिंदर का कहना है, "भारत को ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ों के सामने शुरू में संभलकर खेलना चाहिए क्योंकि अगर कही भारत को दो-तीन झटके लग गए तो फिर वह सुरेश रैना को आसानी से बल्लेबाज़ी नहीं करने देंगे."

मेजबानी का लाभ!

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वे कहते हैं, "भारतीय गेंदबाज़ों को बाउंसर का इस्तेमाल भी हथियार की तरह करना चाहिए क्योंकि अगर वह सही नहीं हुए तो फिर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ उनकी पिटाई कर सकते हैं."

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले सेमीफाइनल को लेकर भारत के पूर्व कप्तान अजित वाडेकर का मानना है, "सभी कह रह हैं कि मेज़बान होने का लाभ ऑस्ट्रेलिया को मिलेगा लेकिन ऐसा लगता नहीं. भारतीय टीम तो ख़ुद तीन-चार महीनों से वही हैं."

वे कहते हैं, "वैसे भारत को डेविड वॉर्नर और स्टीव स्मिथ जैसे उनके बल्लेबाज़ों को थोड़ा रोककर रखने की रणनिति बनानी चाहिए."

रणनीति

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इनके अलावा भारत के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ नयन मोंगिया का कहना है कि अगर मैं कप्तान होता तो अभी तक खेले गए सातों मैचों में जो रणनीति रही, उसे ही अपनाता.

नयन मानते हैं, "ऑस्ट्रेलियाई टीम के मुक़ाबले भारत की गेंदबाज़ी बेहतर है क्योंकि उनके पास बेहतर स्पिनर नहीं हैं. भारत को अगर पहले बल्लेबाज़ी करने का अवसर मिले तो उन्हें कम से कम तीन सौ रन बनाने चाहिए जो फाइनल के लिए अच्छा स्कोर है."

वे कहते हैं, "इसके अलावा भारत के फिल्डर्स को रन आउट और कैच करने का कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ना चाहिए."

अब देखना है कि मैदान में क्या कुछ होता है.

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