'आप' का क्या होगा योगेंद्र-प्रशांत?

प्रशांत भूषण और केजरीवाल

आम आदमी पार्टी की दिल्ली में आज राष्ट्रीय परिषद की बैठक होने वाली है. पार्टी इस बैठक में प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के बारे में कठोर फ़ैसला ले सकती है.

इसके संकेत शुक्रवार को तब ही मिल गए थे जब प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने संवाददाता सम्मेलन बुलाकर अरविंद केजरीवाल पर अलोकतांत्रिक होने का आरोप लगाया.

ख़ास बात ये है कि ये पूरा घटनाक्रम राष्ट्रीय परिषद की बैठक से ठीक एक दिन पहले हुआ है.

वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का मानना है कि अब भूषण और यादव के लिए आम आदमी पार्टी में कोई जगह नहीं बची है.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पार्टी में अपनी पकड़ को और मज़बूत करने में लगे हैं. इसके लिए वह किसी भी तरह के सवाल या विरोध को बर्दाश्त नहीं करना चाहते हैं.

लेकिन ऐसा करना एक नई नवेली पार्टी के लिए जायज़ भी है क्योंकि जिस तरह की मांग यादव और भूषण कर रहे हैं, उसके लिए यह बहुत उपयुक्त समय नहीं है.

वे आंतरिक लोकतंत्र, पारदर्शिता और सूचना के अधिकार के अंतर्गत पार्टी को लाने की मांग कर रहे हैं.

जिस तरह का टेप सामने आया है और उसमें जैसी भाषा का इस्तेमाल हुआ है, वो ग़लत है.

असल वजह

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इस उठापटक का एक कारण तो यह है कि आशुतोष और आशीष खेतान जैसे नए लोगों के केजरीवाल के पास आने के बाद प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और प्रोफ़ेसर आनंद कुमार को हाशिये पर डाल दिया गया है.

दूसरा कारण है यादव और भूषण के ख़िलाफ़ कही गई बातें. मसलन, वे दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को हराना चाहते थे, केजरीवाल के ख़िलाफ़ साजिश रच रहे थे आदि आदि, उससे दो खेमे बन गए हैं.

इस बैठक में दो संभावनाएं ज़्यादा हैं.

एक तो प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव के साथ राष्ट्रीय परिषद की बैठक में दुर्व्यवहार हो या उन्हें इसमें शामिल होने ही न दिया जाए.

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दूसरी संभावना ये है कि जो लोग इन दोनों लोगों के पक्ष में हैं, वो उठकर खड़े हो जाएं.

एक बात तो तय लग रही है कि अब आम आदमी पार्टी में योगेंद्र और प्रशांत के लिए कोई जगह नहीं है.

ताक़त

इस समय माहौल और ताक़त केजरीवाल के पक्ष में है.

देश में जितनी भी राजनीतिक पार्टियां हैं उनमें से किसी में भी शीर्ष नेतृत्व को चुनौती देने की प्रणाली नहीं है.

ऐसे में केजरीवाल को इतनी जल्दी चुनौती देकर भूषण और यादव ने बहुत बड़ी रणनीतिक ग़लती की है.

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इस पूरे घटनाक्रम से दिल्ली के मतदाताओं में बहुत ख़राब संदेश जा रहा है. उन्हें उम्मीद नहीं रही होगी कि जीतने के बाद ये लोग आपस में ही लड़ने लगेंगे.

भाजपा और कांग्रेस को मौका मिल गया है कि देखिए हमने जो कहा था वो सही है.

इसके अलावा केजरीवाल की छवि एक तानाशाह की बनती जा रही है.

(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी की श्रवण गर्ग से बातचीत के आधार पर)

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