मोम में ढलीं कटरीना, लागत एक करोड़ 40 लाख

  • 28 मार्च 2015
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अंग्रेज़ी में एक कहावत है कि इमिटेशन इज़ द बेस्ट फॉर्म ऑफ फ्लैटरी ..यानी किसी की नकल उसकी तारीफ़ का सबसे बेहतर ज़रिया है.

इस लिहाज़ से देखा जाए तो बॉलीवुड अभिनेत्री कटरीना कैफ़ काफ़ी ख़ुश होंगी. आख़िर आज से लंदन के मशहूर तुसाद म्यूज़ियम में मोम में ढली उनकी मूर्ति जो रखी जा रही है.

ख़ास बात ये है कि मैडम तुसाद में बॉलीवुड हस्तियों के पुतलों की मौजदूगी को 15 साल पूरे हो रहे हैं और इसी ख़ास मौके पर कटरीना को मोम में ढाला गया है.

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कटरीना के पुतले को बनाने के लिए करीब चार महीने लगे और इस पर 20 कलाकारों ने मेहनत की है.

मोम में ढली कटरीना कोई एक लाख 50 हज़ार पाउंड में बनकर तैयार हुई है यानी करीब एक करोड़ 40 लाख रुपए.

पुतले के लिए सितारों के लिबास वाला कटरीना का एक ख़ास डांसिंग पोज़ चुना गया है.

मैडम तुसॉड में बॉलीवुड की एंट्री

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लंदन के मैडम तुसाद म्यूज़ियम में आज भले ही कई बॉलीवुड हस्तियाँ हैं लेकिन साल 2000 से पहले तक ऐसा नहीं था.

दुनिया भर में मशहूर इस म्यूज़ियम में हॉलीवुड की कई फ़िल्मी हस्तियों के पुतले थे, लेकिन दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी फ़िल्म इंडस्ट्री यानी भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री की कोई हस्ती नहीं थी.

यहाँ आने वाले कई पर्यटक लगातार म्यूज़ियम से गुज़ारिश करते रहे कि भारत से फ़िल्मी सितारों की मूर्तियों को भी यहाँ जगह दी जाए.

तब म्यूज़ियम की ओर से लोगों से कहा गया कि वे वोटिंग के ज़रिए बताएँ कि वे किस भारतीय फ़िल्मी स्टार को मैडम तुसाद में देखना चाहते हैं.

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वोटिंग के आधार पर साल 2000 में अमिताभ बच्चन इस म्यूज़ियम में मोम में ढाले जाने वाले पहले भारतीय फ़िल्मस्टार बने.

1999 में बीबीसी की वोटिंग में उन्हें सुपरस्टार ऑफ़ द मिलिनियम चुना गया था.

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भारत से अच्छी ख़ासी संख्या में पर्यटक मैडम तुसाद आते हैं. इसे देखते हुए पिछले 15 सालों में कई बॉलीवुड हस्तियों के पुतले यहाँ रखे गए हैं.

शाहरुख़ खान (2007), सलमान ख़ान और ऋतिक रोशन ढलकर यहाँ मोम हो चुके हैं, तो ऐश्रवर्या राय और माधुरी दीक्षित की ख़ूबसूरती भी यहाँ मोम की मूर्ति में क़ैद है.

कैसी बनती हैं मोम की मूर्तियाँ

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  • मूर्ति को ढालने की प्रक्रिया में 150 किलोग्राम मिट्टी का इस्तेमाल होता है.
  • कारीगर उस हस्ती के सैकड़ों माप लेते हैं, जिनकी मूर्ति बननी होती है या फिर इस हस्ती के लाइब्रेरी शॉट का अध्ययन करते हैं.
  • मूर्ति की आँखे बनाने में कारीगरों को करीब 10 घंटे लगते हैं, आँखों की पुतलियों तक के रंग को मैच किया जाता है.
  • हस्ती की हेयरस्टाइल की नकल करने और सिर पर एक-एक बाल लगाने में कारीगरों को छह हफ़्ते तक लग जाते हैं.
  • एक पुतले को गढ़ने, ढालने और पूरी तरह तैयार करने में चार महीने लग जाते हैं.
  • करीब 20 रंग इस्तेमाल किए जाते हैं ताकि पुतले की त्वचा का रंग असल हस्ती से मिलता जुलता हो.
  • चेहरे की हर सिलवट, हर तिल, डिंपल, झुर्री को ज्यों का त्यों उतारा जाता है.

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