'क्या मैं केजरीवाल को संदेह का लाभ दूंगा ?'

  • 29 मार्च 2015
अरविंद केजरीवाल इमेज कॉपीरइट AP

बीते कुछ दिनों से आम आदमी पार्टी में चल रहे घटनाक्रम पर देश का आम आदमी क्या सोचता है?

बीबीसी ने यह जानने की कोशिश की. देश के एक आम नागरिक मनीष कुमार की लिखी चिट्ठी हम अपने पाठकों से साझा कर रहे हैं.

(मनीष कुमार आप के समर्थक हैं और पार्टी को वोट भी दिया था.)

पढ़िए पूरा लेख

मेरे विचार से वैकल्पिक राजनीति का मतलब है ऐसा शासन, जिसमें सबके साथ बराबरी का सलूक किया जाता हो. ऐसी व्यवस्था, जिसमें क़ानून कमज़ोर और ताक़तवर के बीच कोई भेद नहीं करता हो- जहां तक मुमकिन हो, संसाधनों का बंटवारा भी बराबर हो.

इसका मतलब धनी से धन छीन कर ग़रीब को देना नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच देना है, जहां सबको बढ़ने और फलने फूलने का बराबर मौका मिले.

बीते दो महीनों की घटनाओं से मेरे जैसे लोगों को ज़बरदस्त झटका लगा है, जो यह सोचते थे कि आम आदमी पार्टी ऐसा मंच दे सकता है. मुझे यह कहने में काफ़ी दुख हो रहा है, पर यह पार्टी अपेक्षाकृत कमज़ोर तबके को ऐसा मंच देने में बुरी तरह नाकाम रही है.

क्या इसका अर्थ यह है कि हम नाकाम हो गए हैं? क्या हम नाउम्मीद हो जाएं और एक बार फिर कहने लगें कि “इस देश का कुछ नहीं हो सकता.” कम से कम मैं तो ऐसा नहीं करूंगा.

'जीत मेरी ही होगी'

मैं अब भी वैकल्पिक राजनीति के अपने विचार पर कायम हूं और जीत निश्चय ही मेरी होगी. मैं अरविंद केजरीवाल में भी यही जुनून देखता हूं. यह जुनून है हार नहीं मानने का, यह जुनून है धोखा देने वाले भाषणों से बाहर निकलने का और यह जुनून है ब्लैकमेल होने से इंकार करने का.

इमेज कॉपीरइट Reuters

मैं अरविंद केजरीवाल को संदेह का लाभ दूंगा, पर उन पर नज़र रखूंगा. मैं यह देखूंगा कि वे 67 विधायकों के नेता के रूप में कैसे काम करते हैं, यह देखूंगा कि दिल्ली की जनता को दिए गए आश्वासनों को वे कैसे पूरा करेंगे.

मुझे पूरा भरोसा है कि उन्हें मौका मिलेगा और उनकी कार्रवाइयों से पता चलेगा कि वे वैकल्पिक राजनीति की दिशा में कुछ कर पाएंगे या नहीं.

( ये चिट्ठी एक आम नागरिक ने आम आदमी पार्टी के नाम लिखी है )

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार