पार्टी नेतृत्व पूरी तरह नाकाम रहा: मेधा पाटकर

  • 29 मार्च 2015
मेधा पाटकर इमेज कॉपीरइट Getty

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी से दुखी होकर इसे छोड़ा है.

मेधा पाटकर का यह भी कहना है कि शनिवार को राष्ट्रीय परिषद की बैठक में प्रशांत भूषण और दूसरे साथियों पर कई तरह के आरोप लगाए गए, पर उन्हें साबित नहीं किया गया.

मेधा पाटकर ने शनिवार को पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी.

बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी को अप्रत्याशित कामयाबी मिली, पर उसके बाद कोई ठोस काम नहीं हो पाया. पार्टी में ऐसा कोई फ़ोरम नहीं बचा, जिस पर अपनी बात रखी जा सके."

मेधा पाटकर आम आदमी पार्टी से शुरू से जुड़ी रहीं हैं.

'आरोप साबित नहीं किए गए'

मेधा पाटकर ने कहा कि पार्टी के साथियों की घनघोर अवमानना हुई है, जिससे वे काफ़ी आहत हैं.

उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से कुछ सदस्यों को निकाले जाने की प्ररिया को पूरी तरह ग़लत बताया है.

मेधा पाटकर का यह भी कहना है कि वैकल्पिक राजनीति की बात करने वाली पार्टी के क्रियाकलाप, शैली और इसका कामकाज भी दूसरी पार्टियों से अलग ही होना चाहिए. ऐसा नहीं हुआ. यह पार्टी भी दूसरी पार्टियों की तरह हो गई, ऐसे में वह इस पार्टी में नहीं रहना चाहतीं.

आहत हैं मेधा

मेधा पाटकर ने कहा कि भ्रष्टाचार एक मुद्दा तो है ही, पर इसके साथ व्यवहार भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. इस पर पार्टी नेतृत्व पूरी तरह नाकाम रहा.

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

उन्हें पूरी पार्टी से नहीं, बल्कि इसके नेतृत्व से ही शिकायत है.

अरविंद केजरीवाल की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी एक दिशा थी, जिसस कई साथी सहमत नहीं थे. प्रशांत भूषण भी उनमें एक हैं. पर वह यह नहीं मान सकती कि भूषण ने पार्टी से भितरघात किया है.

पाटकर का कहना है कि देश विदेश के कई लोग उनसे बार-बार कह रहे था कि वह कुछ करें, जो उनके लिए मुमकिन नहीं था. इसलिए उन्होंने पार्टी छोड़ना ही बेहतर समझा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार