सुरक्षित लौटने की ख़ुशी, पीछे छूटे लोगों का ग़म

भारतीय नौसेना के गश्ती जहाज आईएनएस सुमित्रा पर मौज़ूद यमन से निकाले गए भारतीय इमेज कॉपीरइट INDIAN NAVY

युद्ध प्रभावित यमन में फंसे भारतीयों का 385 लोगों का पहला दल गुरुवार तड़के दो विमानों से मुंबई और कोच्चि पहुंचा.

वापस लौटे यात्रियों में से अधिकांश नर्सिंग प्रोफ़ेशन से जुड़े हुए हैं. इन सभी को पहले अदन से पोत के मार्फ़त जिबूटी लाया गया और फ़िर यहां से उन्हें हवाई जहाज से भारत लाया गया.

यमन से मुंबई और कोच्चि पहुँचे लोगों से जब मैंने सुबह सुबह बात की, तो उनकी आवाज़ में ख़ुशी भी थी पर उदासी भी. उनके चेहरे सुरक्षित पहुँचने पर खिले दिखे जबकि पीछे छूटे लोगों चिंता में कुछ लोग दुखी दिखाई दे रहे थे.

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यमन में नर्स का काम करने वाली सेलिना ईवी ने बताया, "हॉस्टल पर गिरे मिसाइल या बम के बाद मैं काफी डर गई थी. हमले के बाद हम अस्पताल चले गए. मैं बहुत डरी हुई थी. मैं किसी भी तरह भारत लौटना चाहती थी. "

सिमी पिछले आठ महीने से अदन के अल गुमारिया अस्पताल में काम कर रही थीं. उन्होंने बताया, "अस्पताल के अधिकारी बहुत अच्छे थे. हॉस्टल पर हमले के बाद उन्होंने न केवल हमारा पासपोर्ट वापस किया बल्कि जिबूटी जाने के लिए बंदरगाह तक पहुंचने की सुविधा भी उपलब्ध कराई. लेकिन उन्होंने अंतिम महीने की तनख्वाह और अनुभव का प्रमाण पत्र नहीं दिया. "

सिमी ने यमन में नौकरी पाने के लिए एक एजेंट को क़रीब एक लाख रुपए दिए थे. आगे की योजना की सवाल पर वो कहती हैं, "मैं कुछ नहीं जानती कि मैं कल क्या करूंगी. "

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लिज़ी ने नौकरी पाने के लिए एजेंट को कर्ज़ लेकर 85 हज़ार रुपए दिए थे. इसे वो चुकता कर चुकी हैं.

वो कहती हैं, "हम भारत या भारत से बाहर रोज़गार की तलाश करेंगे. दो साल पहले यमन में काम शुरू करने से पहले मैंने तीन साल तक सऊदी अरब में काम किया था. "

वो कहती हैं, " मैं अब सऊदी अरब में काम नहीं कर सकती हूं क्योंकि मैं माँ बन चुकी हूं. "

रोज़गार की तलाश

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यमन में काम कर रही डिप्लोमाधारी नर्सों को क़रीब 30 हज़ार रुपए की तनख्वाह मिलती थी. भारत लौटी अधिकांस नर्सों की प्राथमिकता रोजगार के अवसर तलाशना है.

अभी भी बहुत से भारतीय यमन में फंसे हुए हैं.

बंगलुरु के व्यवसायी रविकुमार यमन की राजधानी सना में फंसे हुए हैं. उन्होंने कहा, "हमें बुधवार की सुबह साढ़े आठ बजे की फ्लाइट पकड़ने के लिए हवाई अड्डा पहुंचने को कहा गया. लेकिन बाद में हमें कहा गया कि हवाई अड्डा न जाएं, क्योंकि फ़्लाइट रद्द हो गई है. "

उन्होंने बताया, "एक घंटे बाद हमें बताया गया कि विमान साढ़े नौ बजे उड़ान भरेगा. दूतावास के अधिकारी भी समय पर हवाई अड्डे पर नहीं पहुंचे. वो बहुत बाद में आए. वापसी का इंतजार कर रहे यात्रियों में बेचैनी थी. हमने चार-पांच घंटे तक इंतज़ार किया. लेकिन अंत में हमें बताया गया कि कोई उड़ान नहीं है. "

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उन्होंने कहा कि किसी को भी इसकी जानकारी नहीं है कि गुरुवार को भी कोई विमान उड़ान भरेगा या नहीं. उन्होंने कहा कि सना में हालात ख़राब होते जा रहे हैं.

यमन में शिया हूती विद्रोहियों की बढ़त को रोकने के लिए सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन बल ने पिछले हफ़्ते हवाई हमले शुरू किए थे.

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