'नहीं बनाओ मुझे हिंदू-मुसलमान'

  • 6 अप्रैल 2015
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जिस तरह मुसलमान और यहूदी सुअर का गोश्त नहीं खाते उसी तरह अगर कोई समाज गाय का गोश्त नहीं खाता तो किसी को क्या आपत्ति हो सकती है.

इसीलिए हमें इसपर कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए कि भारत के 28 राज्यों और केंद्र प्रशासित प्रदेशों में कहां गाय का गोश्त खाने और बेचने की इजाज़त है, कहां बैल,बछड़े और भैंस का गोश्त उपलब्ध है और कहां हर तरह के गोश्त बेचने और खाने पर सख़्त सज़ा है.

हमें इस झगड़े में भी नहीं पड़ना कि बीफ़ का कारोबार करने वालों की अधिक संख्या मुस्लिम वर्ग से है और बीफ़ मुसलमानों के साथ-साथ बहुत से उदारवादी हिंदुओं, सिक्खों, दलितों, आदिवासियों और इसाईयों वगैरह के भोजन का भी हिस्सा है.

भैंस का गोश्त

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हमें बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं कि भारत इस वक़्त ब्राजील के बाद विश्व का दूसरा बड़ा बीफ़ का निर्यातक है.

हां एक ख़बर पढ़ कर थोड़ी परेशानी हुई कि जब से महाराष्ट्र में पिछले महीने से बीफ़ पर मुक़्क़मल रोक लगा है तब से वहां के चिड़ियाघरों और नेशनल पार्क में मांसखोर जानवरों को बस मुर्गी या थोड़ा-बहुत भैंस का गोश्त मिल रहा है.

तब से हम सोच रहे है कि क्या बीत रही होगी मुंबई के संजय गांधी नेशनल पार्क में कई साल से रहने वाले मगरमच्छ पर जब उसने केरला से आने वाले मेहमान मगरमच्छ को चिकन पेश किया होगा और मेहमान ने चिकन को उलट-पलट कर कहा होगा, " ये कौन सा पक्षी है. हमारे केरल में तो नहीं होता."

कौन है शेर?

सोलापूर के महात्मा गांधी चिड़ियाघर के पिंजरे में सुंदरवन के उस शेर पर क्या बीती होगी जब उसने ज़ू के वार्डन से सुना होगा हुकुम आज के बाद भैंस का किलोभर गोश्त ही मिलेगा. खाना है तो खाओ वर्ना भाड़ में जाओ.

जब औरंगाबाद के सिदार्थ ज़ू में एक रीछ भो-भो रोया होगा और कहा होगा मुझे नहीं खाना भैंस और चिकन का यह मिक्सर. भगवान के लिए मेरा ट्रांसफ़र गोवा, पश्चिम बंगाल या मणिपुर के किसी ज़ू में कर दो. वहां और कुछ नहीं तो प्योर बीफ़ तो मिलेगा.

फिर पूणे के राजीव गांधी जूलॉजिकल पार्क में रहने वाला तेंदुआ अपने सुपरवाइज़र पर चीखा होगा " अपने नेताओं को मेरी ओर से चेतावनी दो कि जंगल में मेरे कजन शेर और चीते के मुंह से गाय छीन कर दिखाओ तब जानू कि शेर कौन है. "

हालांकि पाकिस्तान में कोई भी सूअर का गोश्त खरीदने-बेचने के बारे में सोच भी नहीं सकता फिर भी जब पालतू या शिकारी कुत्ते सूअर मारते है तो उन्हें दावत उड़ाने से कोई नहीं रोकता और ना ही इन कुत्तों का मालिक इन्हें घर लाकर धर्म भ्रष्ट करने पर जूते मारता है.

हिंदू-मुसलमान

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तो ऐ मेरे प्यारे नेताओं तुम भले किसी को बीफ़ खाने दो, ना दो, ये तुम्हारा लोकतांत्रिक अधिकार है मगर पशु-पक्षियों को हिंदू-मुसलमान नहीं बनाओ. उन्होंने क्या बिगाड़ा है.

वो खुद तो किसी चिड़ियाघर में चलकर आए नहीं है तुम ही पकड़ कर लाए हो. हां अगर कोई जानवर कोई क़ानून तोड़े तो भले ही उसे कड़ी से कड़ी सज़ा दो जैसा कि खाड़ी के एक देश के चिड़ियाघर में हुआ था.

जहां नए-नए पकड़े गए एक शेर को रोजाना केले और बंदर को बीफ़ दिया जाने लगा. किसी ने चिड़ियाघर के अफ़सर से पूछा कि ये क्या ज़ुल्म है.

अफ़सर ने हंसते हुए कहा कोई ज़ुल्म-उल्म नहीं ये शेर बंदर का वेश बदलकर और वो बंदर शेर के पासपोर्ट पर अपनी तस्वीर लगाकर इस देश में दाख़िल होते हुए पकड़े गए तब से शेर को सज़ा के तौर पर केले और बंदर को बीफ़ दिया जा रहा है.

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