जब मोहन भागवत, अज़ीम प्रेमजी एक मंच पर आए..

मोहन भागवत के साथ अज़ीम प्रेमजी इमेज कॉपीरइट RASHITRYA SEVA BHARTI

प्रमुख भारतीय आईटी कंपनी विप्रो के प्रमुख अज़ीम प्रेमजी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन राष्ट्रीय सेवा भारती की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत की है.

उस कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे.

हालाँकि प्रेमजी ने शुरू में ही यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि कार्यक्रम में शामिल होने का यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि वे संघ की नीतियों का भी समर्थन करते हैं.

'सहयोगियों के आशंका थी'

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प्रेमजी ने कहा कि मोहन भागवत ने उन्हें इस कार्यक्रम में आने का न्योता देकर उन्हें सम्मानित किया है.

उन्होंने कहा, "भागवत से मिलने के बाद मैं समझा कि किस तरह कुछ लोग देश की जनता के वास्तविक विकास के लिए समर्पित हैं, वे लोग अपने काम के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. लोगों के बीच मौजूद विचारधाराओं के मतभेद को काम के आधार पर पाटा जा सकता है".

प्रेमजी ने कहा, "मेरे कुछ सहयोगियों को इस कायक्रम में मेरे भाग लेने पर शंका थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि ऐसा करने का मतलब संघ की नीतियों का भी समर्थन करना होगा. पर वे ग़लत हैं."

प्रेमजी ने अपनी ट्रस्ट और इसके कामकाज के बारे में लोगों को विस्तार से बताया. इस कार्यक्रम में आरएसएस-भाजपा के राम माधव और जीएमआर समूह के प्रमुख जीएम राव भी मौजूद थे.

ट्विटर पर छाया मामला

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ट्विटर पर यह मामला छाया हुआ है. ममता निगम ने ट्वीट किया है कि जो संगठन देश में दंगे करवाता है और सांप्रदायिक विद्वेष फैलाता है, उसके कार्यक्रम में शामिल होकर अज़ीम प्रेमजी ने यह साबित कर दिया है कि वे सांप्रदायिक हैं.

आभा जक़रिया ने ट्वीट किया है कि प्रेमजी ने तो यह पहले ही साफ़ कर दिया कि वे आरएसएस की नीतियों से सहमत नहीं हैं.

माज़ ने ट्वीट किया कि वे लोग ग़लत हैं, जो समझते थे कि अब लोग प्रेमजी से नफ़रत करने लगेंगे. एंथनी बरबोसा पूछते हैं कि आख़िर प्रेमजी क्या साबित करना चाहते हैं?

निखिल दाधीच सवाल उठाते हैं कि क्या आरएसएस चरमपंथी संगठन है? फिर प्रेमजी के वहां जाने से हंगामा क्यों बरपा है?

नदीम राम अली कहते हैं कि वे प्रेमजी का काफ़ी सम्मान करते हैं क्योंकि उन्होंने आठ हज़ार करोड़ स्कूली शिक्षा को बेहतर करने के लिए लगाए हैं.

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