ये जज डूबती बच्ची के पीछे झील में कूद गए

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शनिवार को चंडीगढ़ में जब सुखना झील के किनारे एक जज सैर कर रहे थे, तो उन्होंने झील में डूबती एक बच्ची को देखा.

न्यायमूर्ति मुत्ताकी जयपाल ने तुरंत झील में छलांग लगाई और तैरते हुए बच्ची के पास पहुँच गए और उसे बचा लिया. तब उनके साथ उनके निजी सुरक्षा अधिकारी यशपाल भी मौजूद थे.

न्यायमूर्ति जयपाल ने ईश्वर का शुक्रिया अदा किया है कि उन्हें एक इंसान की जान बचाने का मौका मिला.

उनका कहना था, “पहले मैं एक इंसान हूं फिर जज.”

न्यायमूर्ति जयपाल की पत्नी भवानी ने घटना की जानकारी देते हुए बताया, "आमतौर पर वे मुझसे तेज चलते हैं इसलिए मैं उस समय उनके पीछे पीछे चल रही थी. मैंने उन्हें उस लड़की को बचाते हुए देखा. मुझे उन पर बहुत गर्व है.”

पढ़ाई बंद होने से दुखी

बच्ची नौवीं कक्षा में बहुत अच्छे नंबरों से पास हुई थी. उसके पिता रिक्शा चलाते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण पिता ने बेटी को आगे पढ़ाने में अपनी असमर्थता ज़ाहिर की थी.

इसी बात को लेकर लड़की दुखी थी और माना जा रहा है कि संभवत: उसने झील में डूबने की कोशिश की थी.

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Image caption न्यायमूर्ति मुत्ताकी जयपाल.

न्यायमूर्ति जयपाल की पत्नी कहती हैं, “हमें जब लड़की के आत्महत्या की वजह की जानकारी हुई तो हम उसके पिता से मिले. उन्हें मनाया कि वे बच्ची की आगे पढ़ने से ना रोकें. साथ ही, हमने लड़की के इलाज का खर्च उठाने का भी फैसला लिया है."

लड़कियों की शिक्षा पर जोर देते हुए भवानी कहती हैं कि माता पिता को चाहिए कि वे अपनी बेटियों को जरूर पढ़ाएं.

न्यायमूर्ति मुत्ताकी जयपाल के तीन बच्चे हैं. उनका बेटा इंजीनियर है. दो बेटियों में से एक डॉक्टर है जबकि दूसरी विदेश में स्नात्कोत्तर की पढ़ाई कर रही है.

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