चंदन तस्कर मुठभेड़: पाँच अनसुलझे सवाल?

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आंध्र प्रदेश पुलिस ने कहा है कि मंगलवार को उन्होंने मुठभेड़ में 20 चंदन तस्करों को मार दिया. हालाँकि मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने इन मौतों पर सवाल उठाए हैं और जांच की मांग की है.

हमने इस घटना से संबंधित कुछ अनसुलझे सवाल उठाए हैं.

पुलिस का कहना है कि उन्होंने 100 से अधिक तस्करों के एक ग्रुप को चुनौती दी, जो चित्तूर ज़िले के तिरुपति के नज़दीक के घने जंगलों में पेड़ काट रहे थे.

पुलिस का कहना है कि जंगल में दो अलग-अलग स्थानों पर जब पेड़ काट रहे इन लोगों से अपने हथियार सौंप देने के लिए कहा गया, तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया और पुलिस पर कुल्हाड़ी, डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया.

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पुलिस का दावा है कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं.

भारत के पश्चिमी घाटों में पाए जाने वाले लाल चंदन के पेड़ों को संरक्षित प्रजाति में रखा गया है और यह आंध्र प्रदेश में चार ज़िलों तक फैले हुए हैं.

लाल चंदन के निर्यात पर प्रतिबंध और इसके बहुत कम आपूर्ति का मतलब है कि चीन और जापान जैसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसके बदले हज़ारों डॉलर मिलते हैं, जहाँ इसका इस्तेमाल फर्नीचर, संगीत उपकरणों और यहाँ तक कि खिलौने बनाने के लिए होता है.

पाँच अनसुलझे सवाल

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मानवाधिकार संगठनों ने इन मौतों पर सवाल उठाए हैं और कहा कि पुलिस कई सवालों के जवाब नहीं दे पाई है.

1- चंदन की लकड़ियां काटने वालों पर गोलियां चलाने से पहले चेतावनी के तौर हवा में गोलियाँ क्यों नहीं चलाई गई?

2- गोलियां चलाने से पहले उन्हें गिरफ़्तार करने के प्रयास क्यों नहीं किए गए?

3- ऐसा कैसे हुआ कि 20 मारे गए लोगों में से 13 को कमर ऊपर गोलियां लगी थी, और अधिकतर संदिग्ध तस्करों के पीठ पर गोली लगी थी?

4- शव एक किलोमीटर के फ़ासले पर दो जगहों पर मिले हैं. क्या पुलिस की दो टीमों ने गोलियां चलाई?

5- क्या मारे गए लोग वाकई तस्कर हैं या तस्कर गैंग के भाड़े पर लिए गए मजदूर?

आंध्र प्रदेश मानवाधिकार मंच के महासचिव वीएस कृष्णा कहते हैं, “सभी सबूत इशारा करते हैं कि मजदूरों को घेरकर गोलियों से मारा गया. ये 20 लोगों का कत्ल है.”

क्या है हक़ीक़त?

घटनास्थल और अस्पताल का दौरा कर चुके एक पत्रकार का कहना है कि “मारे गए ज़्यादातर लोगों को गर्दन के नीचे गोली मारी गई थी और लगता है कि या तो वे भाग रहे थे या उन्हें पीछे से गोली मारी गई.”

Image caption विपक्षी दल इस घटना की जांच के लिए चंद्रबाबू नायडू पर दबाव बना रहे हैं.

पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है. पुलिस का कहना है कि उन्होंने तब गोलियां चलानी शुरू की जब पाया कि वहां बड़ी संख्या में कथित तस्कर हैं.

इस अभियान का हिस्सा रहे एक पुलिसकर्मी अशोक कुमार ने कहा, “हम 40-50 लोग थे और सिर्फ़ 8-10 के पास ही हथियार थे. जब उन्होंने हमला करना शुरू किया, तब हमने अपनी जान बचाने के लिए गोलियां चलानी शुरू की.”

हालाँकि ये दलीलें, एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों के गले नहीं उतर रही हैं और उन्होंने घटना की जांच कराने की मांग की है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के अभीर कहते हैं, “इस मामले की आपराधिक जांच होनी चाहिए कि क्या पुलिसवालों ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया. पुलिस क़ानून से ऊपर नहीं है.”

मजदूर या तस्कर?

एमनेस्टी ने एक बयान में कहा है कि इस घटना में एक भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ था, फिर भी 11 पुलिसकर्मियों को उनकी चोटों के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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Image caption चंदन तस्कर वीरप्पन पर कुछ समय पहले एक फ़िल्म भी बनी थी.

चंदन की लकड़ियां काटने वालों के शव दो जगहों पर एथागुंटा और सिरिवारिमुत्तू में पाए गए.

घटनास्थल पर गए एक और पत्रकार ने कहा, “दोनों जगहों के बीच एक किलोमीटर का फ़ासला है. दिलचस्प ये है कि सभी शव खुली जगह में पाए गए. उनके लिए जंगलों की तरफ भागना और छिपना मुश्किल नहीं था.”

माना जा रहा है कि मारे गए लोगों में से अधिकतर तमिल थे और मानवाधिकार संगठनों को उन्हें तस्कर कहने पर हैरानी है.

तमिलनाडु में तीखी प्रतिक्रिया

अधिकतर ख़बरों में कहा गया है कि उन्हें तस्करों ने प्रतिदिन तीन हज़ार से पाँच हज़ार रुपए के भाड़े पर रखा गया था.

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Image caption तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पनीरसेलवम ने इस घटना की जांच की मांग की है.

जैसा कि उम्मीद थी कि इन मौतों की पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में तीखी प्रतिक्रिया हुई है. मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम ने जाँच की मांग की है और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का कहना है कि मानवाधिकारों का ‘गंभीर उल्लंघन’ हुआ है.

पनीरसेल्वम ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति पेड काटने का अवैध काम कर रहा था, तो ऐसे गंभीर कदम उठाने से पहले उन्हें पकड़ने के प्रयास होने चाहिए थे.”

इस क्षेत्र में पहले भी पुलिस और चंदन तस्करों के बीच मुठभेड़ की घटनाएं होती रही हैं.

दिसंबर 2013 में सेशाचलम के जंगलों में दो वन अधिकारियों की कथित तौर पर पत्थरों से मार-मारकर हत्या कर दी थी.

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