आपके मकान पर लगने वाली है सरकार की नज़र

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क्या आपको भी सड़कों पर निकलते खांसी आने लगती है या आपके बच्चे को ज़ुकाम कुछ ज़्यादा होने लगा है?

अगर हाँ, तो इसकी वजह वातावरण में बढ़ता वायु प्रदूषण हो सकता है और ख़ासतौर से भवन निर्माण कार्य में निकलने वाली धूल और कचरा

लेकिन थोड़ी चैन की सांस लीजिए क्योंकि भारतीय पर्यावरण मंत्रालय अब ऐसे नियम बनाने की तैयारी में हैं जिससे भवन निर्माण कार्य में निकलने वाले कचरे को उपयुक्त तरीके से निबटाया जा सके.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने ये बयान मीडिया में आ रहीं उन ख़बरों के बाद दिया जिनके मुताबिक़ दिल्ली-एनसीआर में ये समस्या वायु प्रदूषण के रूप में विकराल रूप धारण कर चुकी है.

उन्होंने कहा, "भवन निर्माण कार्य के दौरान निकलने वाले कचरे और उससे होने वाले प्रदूषण का हमने संज्ञान लिया है और पंद्रह दिनों के भीतर ही इससे निपटने के नियम बनाए जाएंगे".

मुश्किल डगर

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सवाल ये उठता है कि एकाएक ऐसा क्या हो गया कि सरकार ने मात्र पंद्रह दिनों में नियम तय करने की बात कर डाली।

जानकारों का मानना है कि ऐसे एक क़ानून पर लंबे समय से काम चल रहा था क्योंकि समस्या वाकई में गंभीर है.

पर्यावरण सम्बन्धी मामलों की संस्था 'टेरी' में कार्यरत डॉ सुनील पांडे को लगता है कि तेज़ी से विकसित होते शहरों में हाल बुरे हैं.

उन्होंने कहा, "सभी मेट्रो और बड़े शहरों में निकलने वाले कचरे में से लगभग 15% कचरा भवन निर्माण के दौरान या इमारतों को गिराने के बाद का होता है. भारत में इस कचरे को उस तरह से रिसायकिल भी नहीं किया जाता जैसे -जापान या सिंगापुर में होता है".

नुकसान

भवन निर्माण कार्य में निकलने वाले कचरे से बढ़ते जा रहे वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य सम्बन्धी विपरीत प्रभावों पर पिछले कुछ दिनों में बड़ी बहस छिड़ी हुई है.

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई वर्षों से भारतीय शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण और बच्चों-बूढ़ों में इसके चलते बढ़ रही बीमारियों पर नाराज़गी जताते रहे हैं.

सेंटर फॉर साइंस ऐंड एनवायरनमेंट में वायु प्रदूषण पर विशेषज्ञ डॉ अनुमिता कहती हैं कि क़ानून कब का बन जाना चाहिए था.

उन्होंने कहा, "इस कचरे से निकलने वाली धूल में सीमेंट, ऐस्बेस्टस, सिलिका और तमाम किस्म के सिंथेटिक पदार्थ होते हैं जो जानलेवा हो सकते हैं".

हालांकि सरकार ने मामले से निपटने की मंशा तो दिखाई है लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसे लागू करने में अभी लंबा समय लग सकता है क्योंकि मामला भारत के दर्जनों शहरों का है.

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