ऐसे जकड़ा गया सत्यम के रामलिंगा राजू को

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सत्यम घोटाले सीबीआई के जिस अधिकारी ने इस मामले की जांच से लेकर चार्जशीट दाख़िल करने तक निगरानी की, वो हैं वीवी लक्ष्मी नारायन.

फ़िलहाल वो ठाणे पुलिस में ज्वाइंट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं.

वीवी लक्ष्मी नारायन ने बीबीसी में बताया कि कैसे उनकी टीम ने जकड़ा सत्यम के मालिक रामलिंगा राजू को.

उन्हीं की ज़बानी

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Image caption सत्यम घोटाले की चार्जशीट पेश किए जाने तक जांचकर्ता रहे वीवी लक्ष्मीनारायण मानते हैं कि यह मामला बेहद जटिल था.

यह एक अकाउंटिंग फ़र्ज़ीवाड़ा था. यह कोई सामान्य केस नहीं था.

हमने इस केस की जांच के लिए कुशल लोगों को लेकर एक बड़ी टीम बनाई.

इसमें रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया, इनकम टैक्स विभाग और अन्य बैंकों के विशेषज्ञों को शामिल किया.

इसके अलावा टीम में साइबर फ़ारेंसिक एक्सपर्ट और चार्टर्ड अकाउंटैंट भी थे. कुल मिलाकर यह कई विशेषज्ञों वाली एक टीम थी.

इस वजह से हमें इस केस को समझने में काफ़ी मदद मिली.

साथ ही मामले की पहले पैंतालीस दिनों की आंध्र प्रदेश पुलिस की जांच भी काफ़ी मददगार साबित हुई.

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हालांकि हरेक केस की अपनी जटिलताएं होती हैं, लेकिन वित्तीय अनियमितता के इस मामले की जांच प्रक्रिया आगे भी ऐसे ही मामलों में जांचकर्ताओं के काम आएगी.

मुझे लगता है कि हमने जिस तरीक़े से सबूत इकट्ठा किए यह भी आगे जाँच में काम आएगा.

हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, सिस्टम को समझना, धोखाधड़ी कैसे हुई इसे समझना और फिर सबूत इकट्ठा करना.

वित्तीय गड़बड़ी में यह समझना अधिक महत्वपूर्ण होता है कि पैसे का लेन देने कब कहां और कैसे किया गया.

यह बहुत मेहनत और योजनाबद्ध तरीके से करने वाला काम होता है.

(बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बातचीत पर आधारित)

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