तस्कर मुठभेड़: हत्या का मामला क्यों नहीं?

  • 10 अप्रैल 2015
घटनास्थल

आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि तिरुपति के पास जंगल में कथित मुठभेड़ में मारे गए 20 लोगों के मामले में हत्या का मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया जाना चाहिए.

पिछले मंगलवार को तिरुपति के पास कथित तौर पर लाल चंदन की तस्करी करने वाले 20 लोगों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार दिया था.

सिविल लिबर्टीज़ कमिटी ने इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

याचिकाकर्ता के वकील वी रघुनाथ ने बीबीसी को बताया, ''जब कोर्ट ने ये सवाल किया कि अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज क्यों न दर्ज किया जाए, तो राज्य सरकार ने सोमवार को जवाब देने की बात कही.''

तमिलनाडु में तनाव

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कथित मुठभेड़ में मारे गए लोगों से पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में तनाव बढ़ता जा रहा है, क्योंकि मरनेवाले ज़्यादातर लोग वहीं के थे.

आंध्र प्रदेश की सिविल लिबर्टीज कमेटी के महासचिव, चिलाका चंद्रशेखर ने इस मामले में याचिका दायर की थी. याचिका में इस कथित मुठभेड़ में शामिल पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज करने के आदेश देने की अपील की गई थी.

याचिका में इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग भी की गई थी.

मुख्य न्यायाधीश कल्याण ज्योति सेनगुप्ता की अध्यक्षता वाली डिवीज़न बेंच ने इस मामले की सुनवाई की.

'मजिस्ट्रेट करेंगे जांच'

आंध्र प्रदेश सरकार ने इस घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश पहले ही दे दिए हैं. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ओ पनीरसेलवम को लिखे पत्र में भी इसका ज़िक्र किया है.

रघुनाथ कहते हैं कि उच्च न्यायालय ने सरकार से बुधवार को ही पूछा था कि ''अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया. शुक्रवार को राज्य सरकार ने अदालत में दो एफ़आईआर और पोस्ट मार्टम रिपोर्ट पेश की. जिसके बाद अदालत ने पूछा कि कथित मुठभेड़ में शामिल पुलिकर्मियों के मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया.''

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गुरुवार को मद्रास हाईकोर्ट ने मरने वाले छह लोगों के शवों के अंतिम संस्कार पर रोक लगा दी थी.

इस बीच, वेल्लूर में प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एमडीएमके के नेता वायको को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. वायको इस घटना की जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग कर रहे हैं.

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