प्रतिबंध को चुनौती देंगेः ग्रीनपीस भारत

  • 10 अप्रैल 2015
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भारतीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संस्था ग्रीनपीस के भारत में पंजीकरण को 180 दिनों के लिए निलंबित कर दिया है और उसके बैंक खाते फ्रीज़ कर दिए हैं.

गृह मंत्रालय ने ग्रीनपीस को एफसीआरए एक्ट, 2010 के तहत विदेश से आने वाली आर्थिक मदद के 'सही आंकड़े छुपाने' और 'विकास के ख़िलाफ़' अभियान चलाने का दोषी पाया.

ग्रीनपीस भारत के कार्यकारी निदेशक समित ऐच ने इसे एकतरफ़ा कार्रवाई बताते हुए इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है.

पढ़ें क्या कहते हैं समित ऐच

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कई बार ऐसा हुआ है कि गृह मंत्रालय के अधिकारी कोई नोटिस जारी करते हैं और वह हमारे पास पहुंचने से पहले मीडिया के पास पहुंच जाता है.

ऐसा कैसे होता है यह सोचने वाली बात है.

जब तक नोटिस हमारे पास आता नहीं है, हम कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि कुछ कहने से पहले उसे पढ़ना पड़ेगा.

लेकिन इतना तय है कि यह ग़लत बात है, यह दुर्भावना ग्रस्त है.

पहले एफ़सीआरए के तहत उन्होंने जो प्रतिबंध लगाए थे उसे हाईकोर्ट ने हटाया था. प्रिया पिल्लई मामले में भी कोर्ट ने कहा था कि कार्रवाई, एकतरफ़ा, ज़्यादतीपूर्ण और ग़ैरक़ानूनी है.

सोचने वाली बात यह भी कि यह बार-बार ग्रीनपीस के साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं. यह भारत की नीति के विरुद्ध है.

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बैंक अकाउंट फ्रीज़ करने के बारे में हमें कुछ पता नहीं है क्योंकि अभी हमने कोई लेन-देन नहीं किया है.

लेकिन मैं मानता हूं कि उन्होंने फ्रीज़ कर दिए होंगे, क्योंकि पिछली बार भी यही हुआ था कि मीडिया में रिपोर्ट्स आते ही खातों में संचालन बंद करवा दिया गया था.

भारतीय संस्था

पहले भी एक आईबी रिपोर्ट की बात हुई थी जिसके बारे में आज तक पता नहीं चला कि उसका स्रोत क्या है. वैसे बिना हमें सूचना दिए वह हमारे खाते बंद नहीं करवा सकते.

जब वह नोटिस हमें मिलेगा तो हम उसे पढ़ेंगे और उसे चुनौती अवश्य देंगे.

बीते वित्त वर्ष में हमें जो धनराशि मिली है उसमें से 70 फ़ीसदी भारतीय नागरिकों से प्राप्त हुई है, सिर्फ़ 30 फ़ीसदी अंतरराष्ट्रीय अंश होता है, जो ग्रीनपीस इंटरनेशनल से मिलता है.

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हम एक भारतीय संस्था हैं. अगर किसी संस्था में किसी पक्ष का 70 फ़ीसदी नियंत्रण है तो संस्था पर उसी का नियंत्रण होता है और हमारे यहां भारतीय नागरिक ही हैं जिनका नियंत्रण है.

रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ग्रीनपीस इंडिया ने विदेशों से मिले धन को कम करके दिखाया है, यह बात ग़लत है.

नोटिस मिलने के बाद हम उसे मुद्दावार चुनौती देंगे.

(ग्रीनपीस भारत के कार्यकारी निदेशक समित ऐच से बीबीसी संवाददाता विनीत खरे की बातचीत पर आधारित)

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