फ्रांस में मोदीः रफ़ाएल डील 7 सवाल में

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ़्रांस के साथ रफ़ाएल लड़ाकू विमान के सौदे का एलान किया है, जिसे भारत के रक्षा मंत्री ने एयरफ़ोर्स के लिए ऑक्सीजन कहा है.

लेकिन इस सौदे पर सवाल उठ रहे हैं. पहले इस सौदे के तहत 18 विमान फ्रांस से तैयार हो कर आने थे और बाक़ियों को यहीं भारत में जोड़ा जाना था लेकिन अब 36 विमान सीधे वहीं से तैयार हो कर आने की बात कही जा रही है.

ख़ुद बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस विमान पर सवाल उठाए हैं और सौदा रोकने के लिए कोर्ट तक जाने की चेतावनी दी है.

बीबीसी हिंदी ने रक्षा मामलों के जानकार राहुल बेदी के सामने रफ़ाएल सौदे को लेकर पांच सवाल रखे.

कैसी डील?

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Image caption रफ़ाएल विमान अभी आधुनिक रडार सिस्टम से लैस नहीं है.

पहली बात तो ये कि पहले 18 हवाई जहाज़ लेने थे और अब नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 36 लेने हैं. हालांकि अभी इस डील की डीटेल सामने नहीं आई है कि इससे पहले 126 के लिए जो बातचीत चल रही थी, वो भी आएंगे कि नहीं आएंगे.

ये बात अभी साफ़ नहीं हुई है. लेकिन एक चीज़ तो तय है कि रफ़ाएल के आने या न आने के सवाल का जवाब मिल गया है.

क्योंकि 36 जहाज़ तो निश्चित रूप से आने हैं. भारत को इसकी बेहद ज़रूरत है क्योंकि उनके फ़ाइटर स्क्वैड्रन कम हो रहे हैं. रफ़ाएल के आने से फ़ाइटर स्क्वैड्रन को ताक़त मिलेगी.

बातचीत कब से चल रही है?

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इसके लिए टेंडर 2007 में निकला था फिर ट्रायल को पूरा होने में दो-ढ़ाई साल लग गए. मुक़ाबले में छह जहाज़ थे और एयरफोर्स ने रफ़ाएल को सबसे बेहतर पाया.

एयरफ़ोर्स ने कहा कि उन्हें रफ़ाएल ही चाहिए. फिर रक्षा मंत्रालय के स्तर पर सौदेबाज़ी और क़ीमतों को लेकर बातचीत हुई. ये बातचीत जनवरी 2012 से लेकर आज तक चलती आ रही है. उसका कोई हल नहीं निकला.

हालांकि मोदी के फ़ैसले को लीक से हटकर कहा जा रहा है. उन्होंने जिन 36 जहाज़ों की ख़रीद की बात कही है, उसके बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है.

मुझे लगता है कि इन 36 जहाज़ों की ख़रीद को लेकर भी बातचीत अभी शुरू होगी और सौदे पर दस्तख़त होने में साल भर लग सकता है.

स्वामी की आपत्तियां

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रफ़ाएल एक अच्छा जहाज़ है लेकिन सुब्रह्मण्यम स्वामी जो कह रहे हैं कि उसमें कुछ सिस्टम अभी नहीं जोड़े गए हैं, वो भी सही है.

रफ़ाएल में अभी आधुनिक रडार सिस्टम ‘ईएसए’ नहीं लगाया गया है. फ्रांसीसी कंपनी दासो इसका इंतज़ार कर रही थी कि अगर भारतीय इसे ख़रीदने के लिए तैयार हो जाते हैं तो उस पैसे को वह रडार के रिसर्च में ख़र्च करेगी.

कौन उपयोगकर्ता?

अभी फ़्रांस के अलावा रफ़ाएल के दो ख़रीदार हैं. एक तो फ़्रांस की वायुसेना और दूसरा मिस्र जिसने कुछ अर्से पहले 26 रफ़ाएल जहाज़ों की ख़रीद की घोषणा की है.

सुनने में आ रहा है कि मिस्र इस सौदे को बढ़ाकर 40 करने वाला है. एक दो देश और हैं जहां रफ़ाएल को ख़रीदने पर विचार किया जा रहा है.

कहाँ हुआ इस्तेमाल?

फ़्राँस ने सबसे पहले इन्हें अमरीका के साथ युद्धाभ्यासों में इस्तेमाल किया और कुछ फ़्रेंच पायलटों को अमरीकी युद्धपोतों पर इस जहाज़ को उतारने की ट्रेनिंग भी दी गई.

फ़्राँस ने जनवरी 2013 में इस जहाज़ को माली में इस्लामी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ हवाई अभियान में इस जहाज़ का भरपूर इस्तेमाल किया. इसके बाद सितंबर 2014 में इस जहाज़ को इराक़ में अमरीका के साथ इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ इस्तोमान किया गया.

टेक्नॉलॉजी ट्रांसफ़र का क्या हुआ?

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Image caption भारत के रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर ने रफ़ाएल ख़रीद सौदे को एयरफ़ोर्स के लिए ऑक्सीजन कहा है.

ये एक रहस्य ही है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को 108 जहाज़ों को एसेम्बल करना था लेकिन उस सौदे का क्या हुआ.

एचएएल के चेयरमैन भी मोदी के साथ फ़्रांस में मौजूद थे. इस मुद्दे पर तस्वीर साफ़ नहीं हो पा रही है कि एचएएल का सौदा चलता रहेगा कि रद्द हो जाएगा.

अगले दो चार दिनों में इस पर तस्वीर साफ़ होने की उम्मीद है.

कोई और विकल्प?

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Image caption ब्राज़ील ने रफ़ाएल सौदा रद्द कर स्वीडन से लड़ाकू विमान ख़रीदे थे.

अगर भारत 36 रफ़ाएल लेकर यह सौदा यहीं पर ख़त्म कर देता है तो इन जहाज़ों का आर्थिक रूप से, रखरखाव के नज़रिये से और ऑपरेशन के लिहाज़ से इस सौदे का कोई तुक नहीं बनता.

इस हिसाब से भारत को 36 से ज्यादा ही जहाज़ लेने होंगे. 36 जहाज़ो का मतलब एयरफोर्स के दो स्क्वैड्रन होता है.

इस वक़्त एयरफ़ोर्स को छह से आठ स्क्वैड्रन की ज़रूरत है. भारतीय एयरफ़ोर्स ने रफ़ाएल को लेकर अपनी पसंद साफ़ कर दी है.

(बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन से बातचीत पर आधारित)

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