एसटीएफ़ जवानों के शव खुले में

हमले में घायल जवान
Image caption नक्सली हमले में घायल जवानों में दो की हालत गंभीर बनी हुई है.

छत्तीसगढ़ के सुकमा में माओवादी हमले में मारे गए एसटीएफ़ के सात जवानों के शव अब तक बरामद नहीं किये जा सके हैं.

दक्षिण बस्तर के इलाके में मौसम कल से ही खराब है. सुकमा के इलाके में सुबह से बारिश हो रही है.

यही कारण है कि अभी तक बचाव और राहत दल घटनास्थल पर नहीं पहुंच सका है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ख़राब मौसम के कारण जवानों का शव लाने के लिये हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल मुश्किल है.

ग़ौतलब है कि शनिवार को पुलिस के जवानों का दल रात दो बजे पोलमपल्ली और चिंतागुफ़ा के इलाक़े में एरिया डॉमिनेशन ऑपरेशन के लिये निकला था.

घात लगाकर हमला

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Image caption नक्सली इससे पहले भी सुरक्षा बलों को निशाना बनाते रहे है.

पुलिस बल माओवादियों के प्रभाव वाले इलाक़े में ये ऑपरेशन चलाते हैं.

सुबह एक इलाक़े में नाश्ता करने के बाद 9 से 10 बजे के बीच दोरनापाल के पीडमेल के पास पुलिस का दल जब पहुंचा तो पहले से घात लगाए माओवादियों ने हमला कर दिया.

इस हमले में छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स के एक प्लाटुन कमांडर समेत 7 जवानों की मौके पर ही मौत हो गई और 10 जवान गंभीर रुप से घायल हो गये.

पुलिस के जवान 10 घायलों को तो मौके से निकलने में सफल रहे लेकिन घटना के लगभग 24 घंटे बाद भी मारे गये जवानों के शव नहीं निकाले जा सके हैं.

हालत गंभीर

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Image caption सुरक्षा बल नक्सलियों के प्रभाव वाले इलाक़ों में अभियान चलाते रहते हैं.

इधर राजधानी रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराये गए जवानों में से दो की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है.

सुकमा के पीडमेल में शनिवार को माओवादियों ने एसटीएफ़ के जवानों पर उस समय हमला बोला है, जब राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह एक दिन बाद ही जन सुराज अभियान की शुरुवात बस्तर इलाके से ही करने वाले थे.

यह सुराज अभियान पूरे राज्य भर में चलना था.

लेकिन अब माओवादी हमले के बाद जन सुराज अभियान की तारीख आगे बढ़ा दी गई है.

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