7 कहानियां जो एनकाउंटर में नहीं मरीं

  • 13 अप्रैल 2015
पुलिस मुठभेड़

आंध्र प्रदेश में चित्तूर के पास शेषाचलम के जंगलों में पिछले हफ़्ते कथित मुठभेड़ में मारे गए लोगों में से सात लोग तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई ज़िले के कन्नामंगलम पंचायत के चार गांवों से थे.

मारे गए लोगों के परिवार वालों को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर मद्रास हाई कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार है.

कथित मुठभेड़ में मारे गए लोगों की लाशें तिरुवन्नामलाई सदर अस्पताल के मुर्दाघर में रखी हुई हैं. पीड़ित परिवार वालों ने बीबीसी हिंदी से बात की.

चित्रा, उम्र 46 साल

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मेरा बेटा मागेंद्र 22 साल का था. वो बारहवीं पास था और पत्राचार से इकॉनॉमिक्स की पढ़ाई कर रहा था. तीन भाई बहनों में वो दूसरे नंबर पर था और प्लंबर का काम करता था.

मागेंद्र ने प्लंबरी के अलावा चन्नेई और आस-पास के शहरों में राज मिस्त्री का भी काम किया था, लेकिन जंगलों में नहीं.

मागेंद्र ने पुलिस कॉन्स्टेबल बनने के लिए आवेदन किया था.

मनिकम, उम्र 68 साल

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मेरा बेटा मुरुगन 38 साल का था. हमारे पास कोई ज़मीन नहीं है. मुरुगन पेंटिंग का काम करता था और काम की तलाश में वेल्लूर या पास के शहर में जाता था जहां से वे दो-तीन दिनों बाद लौट कर आता था.

मुरुगन के दो बच्चे हैं. एक बेटी की शादी भी हो गई थी. उसकी 300 रुपये की रोज़ाना की कमाई से परिवार का गुज़ारा चलता था.

कुछ महीने पहले ही उसने मुझसे कहा था कि आप काम करना छोड़ दीजिए, आपकी सेहत अच्छी नहीं रहती. जो कुछ भी हो सकेगा, मैं आपकी देख-भाल करूंगा.

मुनियामा, उम्र 30 वर्ष

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मेरे पति शशिकुमार पेंटिंग का काम करते थे. वे पड़ोस के गाँवों और शहरों में काम की तलाश में जाते थे और कुछ दिनों के बाद लौट आते थे. हमारे पास कोई ज़मीन नहीं है. अब हम केवल मजदूर रह गए हैं.

मेरे बेटे अप्पा-अप्पा कहकर हर वक्त अपने पिता को पुकारते हैं. मैं उन्हें क्या जवाब दूं?

वे पहले कभी जंगलों में नहीं गए. उनकी हत्या करने की कोई ज़रूरत नहीं थी और अब परिवार को उनका शव सौंप दिया जाए.

सांभनु

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मेरा 34 साल का बेटा पलानी वेलु दर्जी का काम करता था. उसने किराये पर एक दुकान ले रखी थी जहां एक कमीज सिलने के उसे 200 रुपये मिलते थे और शर्ट-पैंट की एक जोड़ी के 400 रुपये.

उनकी पत्नी को 43 दिन पहले ही बेटी हुई थी. जब दर्जी का उनका काम अच्छे से चल रहा था तो उन्हें अपनी जान को ख़तरे में डालकर जंगल जाने की ज़रूरत क्या थी.

सेल्वी, उम्र 30 साल

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मेरे पति पेरुमल राजमिस्त्री का काम करते थे. वे मजदूरी के लिए दस दिनों तक कहीं बाहर जाते थे पर वापस लौट आते थे. वे केवल केरल ही जाते थे, वे आंध्र प्रदेश नहीं गए थे.

वे कभी किसी जंगल में नहीं गए थे. उन्होंने घर में कहा था कि वे केरल जा रहे हैं लेकिन पुलिस उन्हें ले गई और जो करना चाहते थे, किया और पोस्ट मॉर्टम के बाद उन्हें शव दिखलाया.

हमारे पास थोड़ी सी ज़मीन है लेकिन पानी नहीं है. यहां तक कि कुओं में भी पानी नहीं है.

कांजीअम्मल, उम्र 25 साल

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मेरे पति मुनिस्वामी राज मिस्त्री थे और गांव में काम नहीं मिलने की वजह से वे पास के गांवों और शहरों में मजदूरी की तलाश में जाते थे. उस रोज़ वो राशन लेने गए थे.

गोपाल, 70 साल

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मेरा बेटा मूर्ति महज़ 32 साल का था और कैटरिंग बिजनेस में सहायक का काम करता था.

उसका ठेकेदार जहां जाने के लिए कहता था वो खाना और बर्तन लेकर जाता था. वो कभी जंगल नहीं गए. हमारे पास बहुत थोड़ी ज़मीन है लेकिन पानी नहीं. वो हमारा इकलौता बेटा था.

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