ऑनलाइन जीवनसाथी खोज सकेंगे विकलांग

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Image caption नारायण बालाकृष्णन डाक विभाग में काम करते हैं.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, भारत में क़रीब 80 करोड़ लोग शारीरिक रूप से विकलांग हैं. इनमें से केवल पाँच प्रतिशत ही अपने लिए जीवनसाथी ढूंढ पाते हैं. ऐसे ही लोगों की मदद के लिए शुरू हुई है शादी कराने वाली एक नई एजेंसी.

विकलांगों की शादी कराने वाली 'वांटेड अम्ब्रेला' नामक मैट्रिमोनियल एजेंसी की शुरुआत मुंबई की रहने वाली 22 साल की कल्याणी खोना ने की है.

कल्याणी ने इस एजेंसी की शुरुआत जुलाई 2014 मे मुंबई से की थी. अब तक पूरे देश के क़रीब 1000 लोग इसमें अपना रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं.

चेन्नई मे रहने वाले 34 साल के नारायण बालाकृष्णन डाक विभाग में काम करते हैं. बालाकृष्णन चल नहीं पाते हैं. उन्हें अपने लिए जीवन साथी की तलाश है.

बालकृष्णन कहते हैं, "मुझे इस एजेंसी की सबसे ख़ास बात यह लगती है कि वो अपने मेंबर्स से सीधे मुलाकात करती है और हमारी पसंद और नापसंद के बारे में विस्तार से पूछती है."

कहां होती है मुश्किल?

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Image caption कल्याणी खोना हर सदस्य से ख़ुद मिलती हैं.

एजेंसी खोलने वाली कल्याणी बताती हैं, "इस तरह की दिक्कत झेल रहे दो लोगों की शादी के सिलसिले में मुलाक़ात करना काफ़ी मुश्किल और अलग बात है"

शादी कराने से पहले सही लोगों की पहचान भी एक मुश्किल काम है. कल्याणी कहती हैं, "कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो विकलांग साथी से इसलिए शादी करने को राज़ी हो जाते हैं क्योंकि उन्हें सरकार की तरफ़ से मिलने वाले 50 हज़ार रुपए के मुआवज़े में दिलचस्पी होती है."

कल्याणी सभी सदस्यों से ख़ुद मिलती हैं और उनके सारे प्रमाणपत्र ख़ुद जांचती हैं.

भारत में शादी के मामले में धर्म और जाति एक बड़ा मुद्दा होता है. लेकिन विकलांग लोगों के लिए इन बंधनों का कोई ख़ास मतलब नहीं है.

मुंबई के रहने वाले अमर जैन देख नहीं सकते और पेशे से वकील हैं. अमर कहते हैं, "मुझे ऐसे जीवनसाथी की तलाश है जो मुझे इस अवस्था में अपनाए. अगर वो दूसरे धर्म की भी हो तो मुझे कोई फर्क़ नहीं पड़ता. बस वह मेरे परिवार और मेरे हालात के साथ ढलने को राज़ी हो जाए."

जाति और धर्म का बंधन

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Image caption अमर जैन कहते हैं कि उन्हें धर्म और जाति से वास्ता नहीं.

अमर को वांटेड अम्ब्रेला के बारे में एक अख़बार से पता चला और कल्याणी से मिलने के बाद उन्हें उनकी सोच और नज़रिया काफ़ी पसंद आया.

अपना अनुभव साझा करते हुए कल्याणी ने बताया, "मेरे अनुभव से मैंने यह जाना है कि समान शारीरिक क्षमता वाले लोग एक दूसरे को ज़्यादा पसंद करते हैं."

उन्होंने बताया, "वे चाहते हैं कि उनके जीवन साथी भी समान अनुभव वाले हों तो बेहतर होगा ताकि उन्हें नए हालात में अपने आप को ढालने में ज़्यादा समय ना लगे."

कल्याणी अब 'सोशल स्पेस' नाम से एक नया प्रोजेक्ट भी शुरू कर रही हैं. इसमें वो अलग-अलग तरह के विकलांगों को आपस में मिलने-जुलने के लिए जगह उपलब्ध कराएँगी. अपने इस प्रोजेक्ट के लिए वो सरकार से भी संपर्क कर रही हैं.

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